Facebook Pixel

Jalti Hui Basti

Author: Basudev Sunani
Translator: Krishnarani Sasmal
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
As low as ₹262.50 Regular Price ₹350.00
25% Off
In stock
SKU
Jalti Hui Basti

- +
Share:
Codicon

ओड़िशा के एक गाँव में उच्च जाति के लोग दलितों की बस्ती में आग लगा देते हैं। नतीजतन चालीस परिवार अपनी ज़मीन से एक झटके में उखड़ जाते हैं। इस तरह एक तरफ़ जहाँ सदियों से जड़ जमाए बैठी जाति-व्यवस्था का क्रूर चेहरा झलक उठता है वहीं दूसरी तरफ़ बेघर हो चुके दलितों का कठिन-कठोर जीवन-संघर्ष शुरू हो जाता है। ‘जलती हुई बस्ती’ उपन्यास इन्हीं दोनों छोरों के बीच पसरे यथार्थ को आधार बनाकर भारतीय समाज के भविष्य की सम्भावनाओं की तलाश करता है।

गाँव से विस्थापित होकर एक शहर में ठौर पाने वाला मकारू बरसों बाद जब अपने पुश्तैनी गाँव की यात्रा पर निकलता है तो पीढ़ी-दर-पीढ़ी भुगते गए भेदभाव, अपमान और उत्पीड़न की स्मृतियाँ सजीव होने लगती हैं। वह उस पीड़ा और सदमे को फिर से महसूस करता है जिन्हें वह हमेशा बिसरा देना चाहता था। इस तरह उसकी यह यात्रा महज अपनी जड़ों की तलाश नहीं, जातिगत हिंसा और उसकी गहरी जड़ों की पड़ताल बन जाती है— और, उस गतिशीलता का संकेतक भी जिस पर मकारू और उस जैसे दूसरों का स्वप्न निर्भर है।

उपन्यास आगाह करता है कि जब तक जाति रहेगी, तब तक उसकी आग हमारे इतिहास और भविष्य को खत्म करती रहेगी। इसका सन्देश स्पष्ट है—जाति के दायरे से बाहर होकर ख़ुद को जानना आज़ादी की दिशा में पहला क़दम है।

ओड़िया दलित साहित्य की एक प्रतिनिधि कृति! अवश्य पठनीय!  

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Krishnarani Sasmal
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 240p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 19.5 X 13 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Jalti Hui Basti
Your Rating
Basudev Sunani

Author: Basudev Sunani

बासुदेव सुनानी

बासुदेव सुनानी का जन्म 27 सितम्बर, 1962 को ओड़िशा के कालाहांडी (नुआपाड़ा) जिले के मुनिगुडा गाँव में हुआ। उन्होंने ओड़िशा पशु चिकित्सा महाविद्यालय, भुवनेश्वर से शिक्षा हासिल की है। दो उपन्यास और बारह कविता-संग्रहों सहित उनकी पैंतीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें प्रमुख हैं—‘पड़ा पोड़ि’, ‘मसानी शहरा देल्ही’ (उपन्यास); ‘अस्पृश्य’, ‘करडि हाट’, ‘छि’, ‘कालिया उबाच’, ‘बोध हुए भल पाइबा मोते जना नाहिं’, ‘मुँ अछि बोली’, ‘संस्कृतिर इतिहास’, ‘ब्राह्मणबाद ओ भारतीय नारी’ और ‘बिचार ओ ब्यबस्था’ (आलोचना/निबन्ध)। उन्होंने हाशिये पर पड़ी डोम भाषा की कविताओं के एक संग्रह का सम्पादन किया है। अखबारों के लिए स्तम्भ-लेखन, विज्ञान विषयक लेखन और अनुवाद भी किये हैं। उनकी रचनाएँ हिन्दी, उर्दू, मराठी, तमिल, पंजाबी, गुजराती, भोजपुरी, अंग्रेज़ी, जर्मन, अरबी और कुछेक ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी भाषाओं सहित विभिन्न देशी-विदेशी भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं।

उन्हें ‘ओड़िशा साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘मुथमिज़ अरिग्नार कलैग्नार एम. करुणानिधि पोर्किज़ी पुरस्कार’, ‘भीम भोई सम्मान’ और ‘भुवनेश्वर पुस्तक मेला पुरस्कार’ सहित अनेक पुरस्कार और सम्मान प्रदान किये गए हैं।

ई-मेल : [email protected] 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top