Facebook Pixel

Hum Jo Nadiyon Ka Sangam Hein-Hard Cover

Special Price ₹335.75 Regular Price ₹395.00
15% Off
In stock
SKU
9788171195558
- +
Share:
Codicon

यह संग्रह अपनी कविताओं के तीव्र आवेग, भाव–विविधता एवं वस्तु–बहुलता के कारण महत्त्वपूर्ण माना जाएगा। बोधिसत्व की कविताएँ मानो अनेक नदियों का संगम हैं। लोकगीतों की ऊष्मा तथा रागात्मकता, वर्तमान जीवन के ‘दुख–तंत्र’ की कठोर प्रतीति और वैचारिक दृढ़ता एवं प्रतिरोध—इन सबके संयोग से ये कविताएँ हमारे लिए एक वैकल्पिक पाठ की सृष्टि करती हैं। ‘हाहाकार के बीच से गुज़रती’ इन कविताओं में दर्ज हैं ‘बेनूर आँखों के ख़्वाब’, ‘सिले होंठों की मुस्कुराहट’ और ‘बँधे हाथों की छटपटाहट’। लोकगीत और बोलियों की शक्ति का उपयोग, जिसके लिए बोधिसत्व की आरम्भिक कविताएँ चिह्नित की गई थीं, उनका अद्यतन रूप यहाँ मिलता है, कुछ ज्वाया और सख़्त।

इनमें बेचैन कर देनेवाली ऐन्द्रिकता है—‘ताज़े आटे की गर्मी थी उसकी ख़ुशी/वसन्त उसके लिए अब उखड़े नाखून की तरह है’। एक विरल करुणा और क्रोध। इनमें जीवन के प्रति समर्थन और लालसा है जैसे कि ‘ऐसा ही होता है’ कविता में, जो साधारण मनुष्य के दैनंदिन प्रेम को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है। ‘गंध’ शीर्षक कविता स्वयं बोधिसत्व की कविताओं में अलग से उल्लेखनीय है। यह एक बड़ी कविता है, हमारे जीवन की दारुण विपत्ति, विडम्बना एवं निजी और सामाजिक के सीमा–प्रदेश पर निरन्तर विद्यमान द्वन्द्व की कविता।

एक बात और—ये कविताएँ गहरे राजनैतिक आशय एवं नैतिक संकल्प की कविताएँ हैं। बोधिसत्व का ही शब्द लेकर कहें तो यह वह कविता है ‘जो समाज के हारे–गाढ़े काम दे’।

—अरुण कमल

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Isbn 10 8171195555
Publication Year 2000
Edition Year 2024, Ed. 2nd
Pages 87p
Price ₹395.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Hum Jo Nadiyon Ka Sangam Hein-Hard Cover
Your Rating
Bodhisatva

Author: Bodhisatva

बोधिसत्व

11 दिसम्बर, 1968 में उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद के भिखारीरामपुर गाँव में जन्मे बोधिसत्व का मूल नाम अखिलेश कुमार मिश्र है। वे यूजीसी के फेलो रहे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से किया गया शोध प्रबन्ध ‘तार सप्तक कवियों की कविता और काव्य-सिद्धान्त’ पुस्तक के रूप में प्रकाशित है। उनके अब तक चार कविता-संग्रह प्रकाशित हैं, जिनके नाम हैं—‘सिर्फ़ कवि नहीं’, ‘हम जो नदियों का संगम हैं’, ‘दुःखतंत्र’ और ‘ख़त्म नहीं होती बात’। ‘महाभारत यथार्थ कथा’ नामक एक किताब पिछले दिनों चर्चित रही, जिसमें महाभारत की कथाओं के आन्तरिक सूत्रों का एक नवीन अध्ययन किया गया है। उनकी कविताओं के भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हैं। कुछ कविताएँ मास्को विश्वविद्यालय के एम.ए. के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। बोधिसत्व साहित्य और सिनेमा दोनों में बराबर दखल रखते हैं। लगभग दो वर्ष ‘स्टार न्यूज़’ के सम्पादकीय सलाहकार रहे। दो दर्जन से अधिक टीवी धारावाहिकों और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म के शोज़ की स्क्रिप्ट्स का प्रमुख हिस्सा रहे बोधिसत्व के क्रेडिट में ‘शिखर’ और ‘धर्म’ जैसी फ़िल्में भी शामिल हैं। पिछले दिनों स्टार प्लस पर प्रसारित हुए धारावाहिक ‘विद्रोही’ का निर्माण उन्होंने अपने प्रोडक्शन हाउस ‘गाथा प्रोडक्शंस’ से किया है। विख्यात टीवी धारावाहिक ‘देवों के देव महादेव’ के लिए शोधकार्य कर चुके हैं। उन्हें ‘भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार’, ‘संस्कृति अवार्ड’, ‘गिरिजाकुमार माथुर सम्मान’, ‘फ़िराक़ गोरखपुरी सम्मान’ समेत कई पुरस्कार प्राप्त हैं।

सम्प्रति साहित्य और सिनेमा के साथ टीवी धारावाहिक के लिए लेखन और निर्माण में व्यस्त हैं।

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top