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Harishankar Parsai : Vyangya Ki Vaicharik Prishthbhoomi

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Harishankar Parsai : Vyangya Ki Vaicharik Prishthbhoomi

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हरिशंकर परसाई सही मायनों में व्यंग्य-लेखन में ‘मास्टर माइंड’ हैं। एक ऐसे लौह-लेखक जिनके कारण ही व्यंग्य एक विधा के रूप में स्थापित हो सका ।

प्रो. राधेमोहन शर्मा ने अपने लघु शोध-प्रबन्ध में विस्तार से विवेचन-विश्लेषण कर हिंदी गद्य साहित्य में परसाई की शिखर-स्थिति को रेखांकित किया है। व्यंग्य के स्वरूप और प्रकार, युग की बात युग के लिए, व्यक्तित्व की पहचान जैसे विश्लेषणों में परसाई के व्यंग्य की समग्रता को समेटा गया है।

हरिशंकर परसाई के पाठकों, छात्रों, अध्यापकों, शोधार्थियों के लिए यह पुस्तक उन्हें गहरे तक समझने के लिए श्रेष्ठ मार्गदर्शक है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 96p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21 X 14.5 X 1.5
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Author: Radhe Mohan Sharma

राधेमोहन शर्मा

प्रोफेसर राधेमोहन शर्मा पारले कॉलेज, बम्बई विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में हिन्दी विभागाध्यक्ष रहे। हरिशंकर परसाई प्रिय व्यंग्य-लेखक के रूप में उनके मन-मस्तिष्क पर छाए रहे, उसी का नतीजा है यह लघु शोध-प्रबन्ध। 

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