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Hansi Aur Des

Author: Rupam Mishra
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Hansi Aur Des

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रूपम मिश्र की कविताओं की ‘आत्मा का आयतन’ बड़ा है। इन कविताओं में समाज और राजनीति के फासीवादी दौर में संवेदनशील लोगों के भीषण अन्तर्द्वंद्व अंकित हुए हैं। यहाँ ‘न्याय के लिए तड़पता मन’ है तो अपनापन खोजते थकता-हारता मन भी है और उसी क्षण भाग जाने का भी एक मन है। यहाँ गाँव-क़स्बे में सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब का देशज मर्सिया है, मुसलमान जोगियों के डर ने उनके बिरहों और निर्गुण सारंगी को ख़ामोश किया है, वही ख़ामोशी इन कविताओं में गूँज उठी है। ‘हँसी और देस’ में जैसे कोई बड़ी ठेठ ज़िद्दी निगाहों से सूचना-संचार के मायाजाल और नफ़रत की बाज़ारू सियासत को बेध रहा है।

यहाँ कितनी ही कहानियाँ हैं—बहुत सी तो ऐसी जो बिसरा दिए जाने की कगार पर हैं, लेकिन आदमीपने के अकाल में लड़ते हुए मनुष्यों के जीते रहने की तमन्ना भी है। लोक-रहन, माटी-पानी और हरियाली को मिटते देखना त्रासद है, इस त्रासदी में प्रेम मानो एक आपद्धर्म है, उनके पूरी तरह मिट जाने से पहले ही मिलन की चाह है क्योंकि उनसे विरहित दुनिया में प्रेम का कोई परिवेश न होगा। भले ही ‘नैतिकता की रंगदारी वसूलते लफुए’ हर कहीं दिखते हों लेकिन असम्भव समझ लिए गए प्रतिरोध की छवियाँ जो अभी भी वास्तव हैं, (बस हमने नज़रें फेर ली हैं), उन्हें इस संग्रह की कविताएँ आँख में उँगली डालकर दिखाती हैं। इन कविताओं में हिन्दी का बहुभाषिक वैभव चमकता है। यहाँ अवध के गँवई मुहावरों और शब्दों का भाषिक छिड़काव नहीं, बल्कि अनुभव और सोच की मातृभाषा का आत्मविश्वास है। रूपम की काव्यभाषा जनता की जनवादी राजनीति के संक्रामक हो उठने के क्षण में उससे गलबहियाँ को आतुर है।

—प्रणय कृष्ण

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 144p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Rupam Mishra

Author: Rupam Mishra

रूपम मिश्र

रूपम मिश्र का जन्म 7 जून, 1983 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के तिलहरा, सुजानगंज में हुआ। वे पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से हिन्दी साहित्य में परास्नातक हैं।

उनकी कविताओं का एक संग्रह ‘एक जीवन अलग से’ प्रकाशित है। ‘हँसी और देस’ उनका दूसरा कविता-संग्रह है। महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कविताएँ नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं। उनकी कविताओं के उर्दू, अंग्रेजी और मराठी अनुवाद प्रकाशित हुए हैं। ग्रामीण जीवन के यथार्थ एवं ग्रामीण स्त्री जीवन के संघर्ष को लेकर वेबपोर्टल ‘फेमिनिज्म इन इंडिया’ से बतौर लेखक जुड़ी हैं। इसके अतिरिक्त समकालीन राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर भी वे विभिन्न पत्रिकाओं और ब्लागों पर नियमित रूप से लिखती हैं।

वे ‘कलावती स्मृति उदीयमान रचनाकार सम्मान’ और ‘मनीषा त्रिपाठी स्मृति अनहद कोलकाता सम्मान’ से सम्मानित हैं। प्रतापगढ़ जिले में पट्टी तहसील के बिनैका गाँव में रहनवारी।

ई-मेल : [email protected]

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