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Gobarganesh-Hard Cover

ISBN: 9788126708161
Edition: 2024 Ed. 7th
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
Special Price ₹845.75 Regular Price ₹995.00
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9788126708161
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‘‘...‘गोबरगणेश’ को पढ़ते हुए मुझे अपनी सुध-बुध बिसर गई। यह अनुभव मुझे सबसे प्रिय और सुखद होता है। जिस रचना से वह धन्यता मिले, उसे धन्य ही कह सकता हूँ। नहीं तो क्या!’’

—जैनेन्द्र कुमार

‘‘...‘गोबरगणेश’ इस बार कुमाऊँ यात्रा में साथ ले गया और वहीं उसे पूरा पढ़ आया। उपन्यास मुझे अच्छा लगा और उस परिवेश में उसे पढ़ना और भी अच्छा लगा। उससे कुछ ही पहले मनोहर श्याम जोशी का ‘कसप’ भी पढ़ा था। इसलिए कुमाऊँ का एक कंट्रास्टिंग चित्र भी सामने रहा। इससे पढ़ने में एक विशेष प्रकार का आनन्द आया। सोचता हूँ कि ‘गोबरगणेश’ के बारे में कुछ लिखूँ...’’

—अज्ञेय

‘‘...विनायक के अनेक दोस्त उपन्यास में अपनी अलग पहचान तो बनाते ही हैं, साथ ही उनके माध्यम से एक उत्तर-भारतीय क़स्बे के सामाजिक जीवन की अनेक परतें अपने बुनियादी अन्तर्विरोधों के साथ उद्घाटित हुई हैं, जिनकी बहुआयामिता सचमुच प्रभावी है।...‘गोबरगणेश’ की भाषा और दृष्टि में, विशेषकर पहले खंड में, बहुत दूर तक एक कवि-उपन्यासकार की संवेदना की छाप मिलती है। यह बात उसे हिन्दी कथाकारों की एक ख़ासी लम्बी और बड़ी परम्परा से जोड़ती है, जिसमें जयशंकर प्रसाद, अज्ञेय, नरेश मेहता, धर्मवीर भारती, मुक्तिबोध आदि अनेक लोग हैं।...’’

—नेमिचन्द्र जैन (‘जनान्तिक’, पृ. 106-07)

‘‘...विनायक की यह दुनिया चार्ल्स डिकेंस के पिप या ओलीवर या डेविड कॉपरफिल्ड के बचपन की दुनिया है—काल्पनिक, पर अनुभूत; आत्यन्तिक, पर विश्वसनीय—इन्द्रधनुषी मानवीय ऊष्मा लिये, वास्तविक यथार्थ से कहीं ज़्यादा यथार्थ, कहीं ज़्यादा संवेद्य। इस दुनिया के अन्न-जल से पला-पुसा विनायक वास्तविक जीवन-समर में प्रवेश करते ही जटिलता की चट्टान से टकराकर बिखरने लगता है...’’

—मलयज (‘संवाद और एकालाप’, पृ. 27)

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1977
Edition Year 2024 Ed. 7th
Pages 331p
Price ₹995.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14 X 2.5
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Rameshchandra Shah

Author: Rameshchandra Shah

रमेशचन्द्र शाह

रमेशचन्द्र शाह का जन्म सन् 1937 में वैशाखी त्रयोदशी को अल्मोड़ा, उत्तर प्रदेश में हुआ। प्रयाग विश्वविद्यालय से उच्‍च शिक्षा पाई। हमीदिया कॉलेज, भोपाल के अंग्रेज़ी विभाग में सेवाएँ दीं। भोपाल में 'निराला सृजनपीठ' के निदेशक रहे।
इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं–'गोबरगणेश', 'क़िस्सा ग़ुलाम' (आठ भारतीय भाषाओं में अनूदित), 'पूर्वापर', 'आख़िरी दिन', 'पुनर्वास', 'आप कहीं नहीं रहते विभूति बाबू', 'असबाब-ए-वीरानी' (उपन्यास); 'जंगल में आग', 'मुहल्ले का रावण', 'मानपत्र', 'थिएटर', 'प्रतिनिधि कहानियाँ' (कहानी-संग्रह); 'कछुए की पीठ पर', 'हरिश्चन्द्र आओ', 'नदी भागती आई', 'प्यारे मुचकुन्द को', 'चाक पर समय' तथा 'देखते हैं शब्द भी अपना समय' (कविता-संग्रह); 'मारा जाई ख़ुसरो' (नाटक); 'शैतान के बहाने', 'रचना के बदले', 'पढ़ते-पढ़ते', 'सबद निरन्तर', 'आड़ू का पेड़', 'स्वधर्म और कालगति', 'स्वाधीन इस देश में' (निबन्ध-संग्रह); 'छायावाद की प्रासंगिकता', 'समानान्तर', 'वागर्थ', 'भूलने के विरुद्ध', 'अज्ञेय : वागर्थ का वैभव', 'अज्ञेय का कवि-कर्म', 'आलोचना का पक्ष', 'समय-संवादी' (समालोचना); 'अज्ञेय : काव्य-स्तबक', 'जड़ की बात' (जैनेन्द्र के निबन्ध), 'प्रसाद रचना-संचयन' (सम्पादन); 'अकेला मेला', 'इस खिड़की से' (डायरी); 'बहुवचन' में दो यात्रा-वृत्तान्त संकलित तथा 'एक लम्बी छाँह' (यात्रा-वृत्तान्त); 'मटियाबुर्ज' ('राशोमन' का अनुवाद), 'दस स्पोक भर्तृहरि' (भर्तृहरिशतक का अंग्रेज़ी पद्यानुवाद) एवं कविताओं की चार पुस्तिकाएँ 'तनाव' पुस्तकमाला के अन्तर्गत प्रकाशित (अनुवाद); कई कविता एवं नाट्य-पुस्तकें (बाल-साहित्य)।
अंग्रेज़ी में : 'येट्स एंड एलियट : पर्सपैक्टिव्ज़ ऑन इंडिया', 'जयशंकर प्रसाद' तथा टेमेनोए अकादमी, लन्दन द्वारा चार व्याख्यानों की पुस्तिका प्रकाशित।
सम्मान : 'शिखर-सम्मान' (मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग), 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार', 'व्यास सम्मान', 'पद्मश्री', 'भवानीप्रसाद मिश्र पुरस्कार', 'महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार', 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' तथा भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता  द्वारा सम्मानित।
सम्पर्क : एम-4, निराला नगर, भदभदा रोड, भोपाल (म.प्र.)।
ई-मेल : [email protected]

 

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