Facebook Pixel

Fengshui-Hard Cover

Special Price ₹420.75 Regular Price ₹495.00
15% Off
In stock
SKU
9788196218485
- +
Share:
Codicon

कबीर संजय की कहानियाँ अछूते अनुभवों, विषयों और ब्योरों का खजाना हैं, ऐसा उनके पहले संग्रह ‘सुरखाब के पंख’ को पढ़ते हुए महसूस हुआ था। यह नया संग्रह उस अहसास को दुबारा पुष्ट करता है। उनकी कहानियाँ आपको आपकी ही परिचित दुनिया में किसी नए दरवाजे से दाखिल कराती हैं और अक्सर ऐसे धूल-अँटे कोनों तक ले जाती हैं जो कहानी विधा के लिए अड्डेबाजी के पसन्दीदा ठिकाने नहीं रहे। गरज कि उनके विषय और ब्योरे विचित्र होने के अर्थ में नहीं, उपेक्षित होने के अर्थ में अछूते हैं। अक्सर वे कहानीकार को अपने बचपन और कैशोर्य की स्मृतियों में भटकते हुए हाथ लगते हैं और वह जब उन्हें साफ-सुथरा करके आपके सामने पेश करते हैं तो आप वैसी ही उत्तेजना अनुभव करते हैं जैसी अपनी किसी खोई हुई अनमोल वस्तु के मिल जाने पर होनी चाहिए। इस संग्रह की एक कहानी ‘थप्पड़’ में वाचक कहता है, ‘बचपन में ज्यादा कुछ कहा नहीं। बस हर वक्त चुप ही रहा। इसलिए अब मन कहता है कि हर वक्त कुछ न कुछ कहता रहूँ। अगर थोड़ा ज्यादा भी हो जाए तो आप लोग बुरा नहीं मानेंगे, इसका मुझे भरोसा है।’ अगर यह वाचक की ही नहीं, कबीर संजय की भी अपनी बात है, तो कहना चाहिए कि भरोसा लाज़िमी है। उन्हें कहानी कहना आता है और वे जैसी अकृत्रिम, अतिरेकों से रहित, रवाँ जुबान में कहानी कहते हैं, उन्हें कौन नहीं सुनना चाहेगा!

—संजीव कुमार

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 160p
Price ₹495.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 20.5 X 13.5 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Fengshui-Hard Cover
Your Rating
Kabir Sanjay

Author: Kabir Sanjay

कबीर संजय

कबीर संजय का जन्म 10 जुलाई, 1977 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। साहित्य के अलावा सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं। पर्यावरण और वन्यजीवन से जुड़े सवाल उनकी रचनात्मकता के केन्द्र में हैं। उनकी प्रकाशित कृतियाँ ‌हैं—‘सुरखाब के पंख’, ‘फेंगशुई’ (कहानी-संग्रह); ‘चीता : भारतीय जंगलों का गुम शहजादा’, ‘ओरांग उटान : अनाथ, बेघर और सेक्स ग़ुलाम’, ‘गोडावण : मोरे अंगना की सोन चिरैया’ (वन्य जीवन); ‘जंगलमन की डायरी’ (पर्यावरण)। ‘तद्भव’, ‘पल प्रतिपल’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘वनमाली कथा’, ‘लमही’, ‘कादम्बिनी’, ‘इतिहासबोध’, ‘गंगा-जमुना’ और ‘हिन्दुस्तान’ सहित हिन्दी की प्रायः सभी महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘जंगलकथा’ पर्यावरण और वन्यजीवन पर केन्द्रित उनका लोकप्रिय फेसबुक पेज है। उनकी कहानी ‘पत्थर के फूल’ लखनऊ में मंचित हो चुकी है। ‘सुरखाब के पंख’ कहानी-संग्रह के लिए उन्हें प्रथम ‘रवीन्द्र कालिया स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।

फिलहाल साहित्य और पत्रकारिता में रमे हुए हैं।

ई-मेल : [email protected] 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top