Ek Bimb Hai Yeh

Poetry
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Ek Bimb Hai Yeh

हिन्दी कविता ने पिछले सौ वर्षों में जो त्वरित विकास किया है, ये कविताएँ उसी का
विस्तार हैं। हिन्दी कविता के विकास की जो वक्र गति है, आज सन् 2004 में इन कविताओं के
शिल्प और कथ्य में अनजाने ही वह विकास झलक मारता है। पिछले दिनों, यानी सन् ’90 के दशक
से कविता भारतीय जीवन के हाशिए पर काम कर रही है। कवि अपने व्यक्तिगत अनुभवों को बार-
बार केन्द्र का अनुभव बताने की कोशिश करते हैं। वे हाशिए को केन्द्र में खींच लाने का प्रयत्न अपने
छोटे-छोटे व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से करते हैं। इसमें घर-परिवार, राजनीति-समाज-संस्कृति-
सारी बातों को समेटकर एक नया राग रचने की कोशिश होती है। विवेक निराला ने भी अपनी
कविताओं से यह काम सफलतापूर्वक किया है।
कविताओं में एक व्यंग्य और भावुकता का मिला-जुला संगम है। अक्सर भावुकता में भी व्यंग्य है
और व्यंग्य भी भावुकता है। इसकी वजह से कविताओं में एक ख़ास क़िस्म की बहिर्मुख मुखरता
अधिक गुंजायमान हो उठी है। ‘सलीका’, ‘निराला का तख़्त’, ‘चिन्तन के लिए’, ‘प्रतीक’, ‘एक
अनन्तिम प्रेमकथा’ और संग्रह की बहुत सारी कविताएँ मेरे इस कथन का प्रमाण हैं। ये सारी कविताएँ
मिलकर उपर्युक्त बिम्ब रचती हैं। अलग से बिम्ब-रचना का प्रयत्न इस कवि में कम है, जो इधर
चलन में है। इसी से यह कवि अपना अलग व्यक्तित्व भी रचता है। बिम्ब-रचना के कारण कविता में
जो गहरे इशारे होते हैं और जो शब्द-संक्षिप्ति आती है, विवेक निराला उस तरह के कवि नहीं हैं।
कहें, तो यह कह सकते हैं कि वे अभिधा के कवि हैं और मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी,
नवीन, भवानी प्रसाद मिश्र और कुछ-कुछ रघुवीर सहाय की परम्परा में आते हैं। उनमें परम्परा से
विचलन नहीं उसी की सम्पुष्टि और बढ़ोतरी है।
उम्मीद करता हूँ कि वे अपने कवि का विकास अपनी ही तरह करने में सफल होंगे।
—दूधनाथ सिंह

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2005
Edition Year 2005, Ed. 1st
Pages 106p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Editorial Review

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Vivek Nirala

Author: Vivek Nirala

विवेक निराला

जन्म : 30 जनू, 1974

शिक्षा : एम.ए., डी. फिल. इलाहाबाद विश्वविद्यालय।

प्रकाशन : ‘एक बिम्ब है यह’ (2005) के बाद दूसरा कविता-संग्रह ‘ध्रुवतारा जल में’; ‘निराला-साहित्य में चेतना और निराला के स्वर’ (आलोचना) तथा ‘सम्पूर्ण बाल रचनाएँ’ नामक पुस्तक का सम्पादन।

सम्प्रति : कौशाम्बी जनपद के एक महाविद्यालय में विभागाध्यक्ष।

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