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Ek Bharam Achchha Jiya

Author: Pradeep Awasthi
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Ek Bharam Achchha Jiya

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सघन अस्त‌ित्व-बोध, प्रेम, समय और समाज के शोर के बीच अपने कुछ सम्पूर्ण पलों की तलाश और बाहर की अपेक्षाओं के चलते अपने आप से छिटकते मन की बेचैनियाँ—यह सब ‘एक भरम अच्छा जिया’ के कव‌ि प्रदीप अवस्थी को थोड़ा अलग बनाता है, और उनकी कव‌िताओं को भी।

गिड़गिड़ाते हुए लोगों की आँखों में झाँककर देखा जाना चाहिए/वे बचाना चाहते हैं कुछ ऐसा/जो जीवन-भर सालता रहेगा।

उनकी कविताएँ दुनिया की विसंगतियों, अन्याय और विद्रूप को तो पहचानती ही हैं, वे उस काम्य की क्षुद्रता को भी समझती हैं, जिसे चाहने और पाने के लिए एक बदहवासी हर तरफ़ नज़र आती है।

जो दौड़ है, और जो होड़ है, उसके आक्रामक घटाटोप के बीच कोई है जो स्वयं को असहाय पा रहा है, ये कविताएँ उसे बचाना चाहती हैं, वह आदमी जो कुछ इसलिए कि यह भागमभाग उसे मानव-सुलभ ऊँचाई के बरक्स कुछ कमतर लगती है, और कुछ इसलिए कि वह उसमें अपनी जगह भी नहीं देख पाता, इसलिए स्वेच्छा से इससे दूर खड़ा है, ये कविताएँ उसकी ओर से हैं। वह कहता है—शालीन लोगों की यह दुनिया/अश्लील नियमों से चलती है।

इस दुनिया में जो प्रचलित है—वह प्रेम हो, सम्बन्ध हों, नियम-क़ायदे हों, हर चीज़ के एकाधिक रूप साथ-साथ काम करते दिखाई देते हैं, एक सच और झूठ, और दोनों ही स्वीकृत। यही वह चीज़ है जो एक संवेदनशील हृदय को लगातार पीड़ा में रखती है। इन कविताओं में वही पीड़ा अभिव्यक्त हुई है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 168p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Pradeep Awasthi

Author: Pradeep Awasthi

प्रदीप अवस्थी

23 अप्रैल, 1986 को राजस्थान के अजमेर में जन्मे प्रदीप अवस्थी का बचपन गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बीता। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई रामपुर, उत्तर प्रदेश से हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक किया। लगभग सभी महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में उनकी कविताएँ और कहानियाँ प्रकाशित होती रही हैं। प्रतिष्ठित वेब-पोर्टल्स पर समसामयिक मुद्दों, समाज और सिनेमा पर कई लेख प्रकाशित हुए हैं। कविताओं का एक साझा संकलन प्रकाशित हो चुका है।

उनकी प्रकाशित पुस्तकों में एक उपन्यास ‘मृत्यु और हँसी’ शामिल है। ‘एक भरम अच्छा जिया’ उनका पहला कविता-संग्रह है।

विश्व-सिनेमा में गहरी रुचि रखनेवाले प्रदीप इन दिनों मुम्बई में पटकथा-लेखन में सक्रिय हैं।

ई-मेल : [email protected]

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