Dhool Ki Jagah

Poetry,Raza Pustak Mala
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Dhool Ki Jagah

“महेश वर्मा महत्त्वपूर्ण युवा कवि हैं जो एक अपेक्षाकृत पिछड़े इलाके में रहकर भी अपनी कहानी-करनी में अग्रगामी हैं। उनके यहाँ निजी और सामाजिक के बीच इधर बढ़ती दूरी से अलग छिटककर उन्हें निरन्तरता में देखने की कोशिश है। वे भाषा और जीवन में बार-बार अपनी कविता गढ़ते हैं जो उनकी कविता में मानवीयता का इज़ाफ़ा करती है और उसकी प्रासंगिकता बनाए रखती है।”

—अशोक वाजपेयी

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Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2018
Edition Year 2018, Ed. 1st
Pages 148p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
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Editorial Review

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Mahesh Verma

Author: Mahesh Verma

महेश वर्मा

30 अक्टूबर, 1969 को अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ में जन्म।

शिक्षा : स्नातकोत्तर (वाणिज्य)

कविताएँ, कहानियाँ और रेखाचित्र सभी महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में प्रकाशित। ब्लॉग्स और वेब पत्रिकाओं में कविताओं का नियमित प्रकाशन। पाकिस्तान की साहित्यिक पत्रिका दुनियाज़ाद और नुकात में कविताओं के उर्दू अनुवादों का प्रकाशन। कविताओं का मराठी, अंग्रेज़ी और क्रोएशियाई में अनुवाद भी प्रकाशित। फ्रेंच अनुवाद प्रकाश्य। चित्रकला में गहरी रुचि।

ईमेल : maheshvermav@gmail.com

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