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Dharohar Kahaniyaan : Chandradhar Sharma ‘Guleri’

Editor: Mohd. Arif
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Dharohar Kahaniyaan : Chandradhar Sharma ‘Guleri’

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संस्कृत कविता में एक शब्द चलता है—भाव सबलता। दो भावों में विरोधी चीजों का मिश्रण। संस्कृत काव्यशास्त्र के आचार्य गुलेरी जी हास्य और करुणा का मेल करते हैं, क्योंकि इस मेल का मुख्य उद्देश्य है करुण रस उत्पन्न करना और करुण रस को थीम में बनाने के ठीक उसके उलटा हास्य को मिलाया जाएगा तो करुणा और भी गहरी और तीव्र होगी। हिन्दी कहानी की दुनिया में किस ऊँचे शिखर से हमने शुरू किया है, ‘उसने कहा था’ उसका सबसे शानदार नमूना है।

—नामवर सिंह

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Mohd. Arif
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 102p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Chandradhar Sharma 'Guleri'

Author: Chandradhar Sharma 'Guleri'

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ का जन्म 7 जुलाई, 1883 को जयपुर, राजस्थान में हुआ। उन्होंने हिन्दी के अतिरिक्त संस्कृत और अंग्रेजी में भी विशेष दक्षता प्राप्त की। बाद में कलकत्ता विश्वविद्यालय से एफ.ए. और प्रयाग विश्वविद्यालय से बी.ए. किया। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर विख्यात जासूसी कथाकार गोपालराम गहमरी ने उन्हें ‘समालोचक’ का सम्पादक बनने के लिए आमंत्रित किया। गुलेरी जी ने उनका यह निमंत्रण स्वीकार किया और उनके सम्पादन में यह पत्रिका चहुँओर प्रसिद्ध हुई। वे नागरी प्रचारिणी सभा के सम्पादक मंडल में भी रहे। उनकी अमर कहानी ‘उसने कहा था’ हिन्दी की उन शुरुआती कहानियों में से एक है जिसका सम्मोहन आज तक पाठकों पर कायम है। ‘सुखमय जीवन’ और ‘बुद्धू का काँटा’ उनकी अन्य बहुचर्चित कहानियाँ हैं। कहानी के अतिरिक्त इतिहास, पुरातत्त्व, निबन्ध, कविता और भाषा विज्ञान के इलाके में भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण काम किया। ‘देवकुल’, ‘पुरानी पगड़ी’, ‘पृथ्वीराज विजय महाकाव्य’, ‘जयसिंह प्रकाश’ (इतिहास और पुरातत्त्व); ‘कछुआ धर्म’, ‘मारेसि मोहिं कुठाउँ’, ‘होली की ठिठोली का एप्रिल फूल’ (निबन्ध); ‘एशिया की विजयादशमी’, ‘अहिताग्निका’, ‘झुकी कमान’, ‘स्वागत’, ‘कुसुमांजलि’, ‘रवि’ (कविता) और ‘पुरानी हिन्दी’ (भाषा-विज्ञान) उनकी अन्य चर्चित कृतियाँ हैं। 12 सितम्बर, 1922 को उनका निधन हुआ।

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