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Chandrashekhar Azad Viveksheel Krantikari-Paper Back

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9788126724048
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‘चन्द्रशेखर आज़ाद : विवेकशील क्रान्तिकारी’ प्रत्येक भारतीय के लिए एक अनिवार्य पाठ्य-पुस्तक की तरह है। चन्द्रशेखर आज़ाद ने भारत के स्वाधीनता संग्राम में महानायक की भूमिका निभाई। सच्चे अर्थों में उनका तन-मन-धन भारतमाता की सेवा में समर्पित रहा। वे आज़ाद जिए और अन्त तक पुलिस के हाथ न आए।

आज़ाद ने अपने साहसी व्यक्तित्व से आज़ादी के देशव्यापी अभियान को क्रान्ति की अद्भुत गरिमा प्रदान की। उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर असंख्य युवाओं ने क्रान्ति के मार्ग पर क़दम बढ़ाए। सरदार भगत सिंह के साथ तो आज़ाद का विशेष लगाव था। इस पुस्तक के अनुसार, ‘भगत सिंह को आज़ाद केवल पार्टी के एक सदस्य के नाते ही नहीं देखते थे, बल्कि उन्हें अपने भाई की तरह, अपने परिवार के व्यक्ति की तरह मानते और अत्यधिक स्नेह करते थे।’ सत्य तो यह है कि आज़ाद को प्रत्येक क्रान्तिकारी में अपना ही रूप दिखाई देता था।

प्रस्तुत पुस्तक अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद के जीवन-वृत्तान्त के साथ उनके युग की महान गाथा रेखांकित करती है। समकालीन सन्दर्भों में यह पुस्तक अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हो उठती है।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2013
Edition Year 2019, Ed. 2nd
Pages 236p
Price ₹199.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Malvender Jit Singh Waraich

Author: Malvender Jit Singh Waraich

मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच

प्रो. मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच का जन्म 1929 में गाँव लाधेवाला वढ़ैच, जिला गुजराँवाला में हुआ। आपने इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र व समाजशास्त्र में एम.ए. तथा क़ानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज, लुधियाना से सीनियर लेक्चरर के रूप में सेवानिवृत्त। आप चंडीगढ़ हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों पर वकालत से भी जुड़े रहे हैं।

आत्मबलिदानी मदनलाल धींगरा और गदर विद्रोहियों के ख़ि‍लाफ़ लिए गए दो फ़ैसलों पर आधारित पुस्तक ‘वॉर अगेंस्ट किंग एम्प्रेरर-गदर ऑफ़ 1914-15’ के आप सह-लेखक हैं, इसके साथ-साथ आपने प्रसिद्ध छह गदर विद्रोहियों की आत्मकथाओं को भी सम्पादित किया तथा इनसे सम्बन्धित विषयों पर शोध में लगे हुए हैं।

 

 

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