Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 1

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Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 1
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भगत सिंह को फांसी

भगत सिंह को फाँसी-1 यह कैसे हुआ कि मामूली हथियारों से लैस कुछ नौजवानों को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद और फाँसी की सजा हुई! ‘युद्ध’, जो उन्होंने लड़ा हालाँकि ‘‘यह युद्ध उपनिवेशवादियों व पूँजीपतियों के विरुद्ध लड़ा गया।’’ और जो ‘‘ न ही यह हमारे साथ शुरू हुआ और न ही यह हमारे जीवन के साथ खत्म होगा।’’ और, मात्र 30 महीने की उल्लेखनीय अवधि में 8-9 सितम्बर 1928 को ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन’ की स्थापना के साथ शुरू होकर, यह सम्पन्न हो गया। विश्वास से भरपूर भगत सिंह के शब्द थे, कि ‘‘मैं अपने देश के करोड़ों लोगों की ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की हुंकार सुन पा रहा हूँ। काल-कोठरी की मोटी दीवारो के पीछे बैठे हुए भी मुझे कहै कि यह नारा हमारे स्वतंत्राता संघर्ष को प्रेरणा देता रहेगा।’’ इस पुस्तक में प्रस्तुत है इसका प्रथमद्रष्टया विवरण।

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Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2010
Edition Year 2010, Ed. 1st
Pages 251p
Translator Kamlesh Jain
Editor Gurudev Singh Sidhu
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.2 X 14.5 X 1.7
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Editorial Review

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Author: Malvender Jit Singh Waraich

मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच

प्रो. मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच का जन्म 1929 में गाँव लाधेवाला वढ़ैच, जिला गुजराँवाला में हुआ। आपने इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र व समाजशास्त्र में एम.ए. तथा क़ानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज, लुधियाना से सीनियर लेक्चरर के रूप में सेवानिवृत्त। आप चंडीगढ़ हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों पर वकालत से भी जुड़े रहे हैं।

आत्मबलिदानी मदनलाल धींगरा और गदर विद्रोहियों के ख़ि‍लाफ़ लिए गए दो फ़ैसलों पर आधारित पुस्तक ‘वॉर अगेंस्ट किंग एम्प्रेरर-गदर ऑफ़ 1914-15’ के आप सह-लेखक हैं, इसके साथ-साथ आपने प्रसिद्ध छह गदर विद्रोहियों की आत्मकथाओं को भी सम्पादित किया तथा इनसे सम्बन्धित विषयों पर शोध में लगे हुए हैं।

 

 

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