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Bharatiya Nepali Sahitya Ka Vaigyanik Itihas

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Bharatiya Nepali Sahitya Ka Vaigyanik Itihas

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गोमा देवी शर्मा ने हिन्दी भाषा की साहित्येतिहास-परम्परा को एक गौरव-मणि दिया है, जिसके कारण वह नेपाल के नेपाली साहित्य से आगे बढ़कर भारतीय नेपाली साहित्य के इतिहास को अपनी सम्पदा का हिस्सा बना सकीं। उनका इतिहास-ग्रंथ हिन्दी में, भारतीय भाषाओं के पहले से उपलब्ध इतिहासों के परिवार का सदस्य बनकर हमें यह अनुभव कराएगा कि भारत की विविध भाषाओं के बहुरंगी भाषा-उद्यान के मनोज्ञ सौन्दर्य में नेपाली का भी बराबर का योगदान है। आगे बढ़कर, यह अनुभव हमारी उस देशज भारतीयता की चेतना का विस्तार करेगा, जो हमें अपनी मातृभाषाओं में विश्व को पुकारने की प्रेरणा देती है और जिससे हिन्दी जीवन-रस ग्रहण करते हुए इस महान राष्ट्र की समग्र-सम्पूर्ण अभिव्यक्ति का माध्यम बनती है।

किसी भी साहित्येतिहासकार को न तो पूरी तरह निर्दोष इतिहास लिखने का दावा करना चाहिए, न पूर्ण अथवा अन्तिम रूप से सही इतिहास लिखने का। ऐसा कोई भी दावा इतिहास के अध्येताओं पर अत्याचार से कम नहीं होता; क्योंकि इससे उनकी ज्ञान की लोकतांत्रिकता पर संकट मँडराने लगता है।...इतिहास के अध्येता स्वयं कुछ प्रश्नों—जिसने इतिहास लिखा है, क्या पहले उसने स्वयं इतिहासकार होने की पात्रता प्राप्त की है? क्या उसके पास इतिहास-दृष्टि है? क्या उसके भीतर इतिहासकार के लिए अनिवार्य नैतिकता-बोध है? क्या उसे इतिहास-दर्शन और इतिहास-लेखन के उद्देश्य की समझ है? क्या वह इतिहास-लेखन की वैज्ञानिक प्रक्रिया से परिचित है? क्या वह विचार-स्वातंत्र्य का पक्षधर है?—आदि पर विचार करने और निर्णय लेने को स्वतंत्र होते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर भी इतिहासकार को अनिवार्य रूप से अपने लिखे इतिहास की सामग्री के भीतर ही उसका स्वाभाविक अंग बना कर देने होते हैं...।

                यह साहित्येतिहास आश्वस्त करता है कि गोमा देवी शर्मा सवालों से भी परिचित हैं, चुनौतियों से भी और अपने दायित्व से भी। उन्होंने वैचारिक-आग्रहों को सूचनाओं के चयन अथवा विवेचन-विश्लेषण पर हावी नहीं होने दिया है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 456p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
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Dr. Goma Devi Sharma

Author: Dr. Goma Devi Sharma

डॉ. गोमा देवी शर्मा

डॉ. गोमा देवी शर्मा का जन्म 3 नवम्बर, 1975 को मणिपुर के इराङ पार्ट-2 गाँव में हुआ। उन्होंने मणिपुर विश्वविद्यालय, इम्फाल (मणिपुर) से हिन्दी साहित्य में दो स्वर्ण पदकों के साथ स्नातकोत्तर किया और वहीं से पी-एच.डी. उपाधि प्राप्त की। गुवाहाटी विश्वविद्यालय, गुवाहाटी (असम) से नेपाली साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि भी हासिल की।

1998 में उनकी पहली नेपाली रचना ‘बीरे’ (एकांकी) ‘संकल्प’ पत्रिका में प्रकाशित हुई। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘नेपाली भाषा र संस्कृति’, ‘मणिपुरमा नेपाली साहित्य : एक अध्ययन’, ‘भारतीय नेपाली साहित्यको विश्लेषणात्मक इतिहास’, ‘शून्य प्रहरको साक्षी’ (नेपाली)। ‘पूर्वोत्तर काव्य सृजन’, ‘साहित्य लहर’, ‘21 श्रेष्ठ लोककथाएँ : असम’, ‘शून्य प्रहर का साक्षी’ (हिन्दी)।

साधनहीन नेपाली लेखकों के लिए समर्पित ‘गोरखा ज्योति प्रकाशन’ की व्यवस्थापक। पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादेमी (मणिपुर इकाई), आगमन साहित्य परिवार, वरिष्ठ नागरिक काव्य-मंच (असम), त्रिगुण फाउंडेशन (मणिपुर), हाम्रो स्वाभिमान (कामरूप, असम) आदि संस्थाओं से संरक्षक, अध्यक्ष व आजीवन सदस्य के रूप में सम्बद्ध।

उन्हें ‘पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादेमी सम्मान’, ‘महाकवि तुलसीदास अन्तरराष्ट्रीय सम्मान’, ‘महर्षि वेदव्यास सम्मान’, असम सरकार के ‘लेखक सम्मान’, ‘शहीद निरंजन सिंह छेत्री सम्मान’, ‘आगमन सम्मान’ आदि से सम्मानित किया गया है।

सम्प्रति : प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, तेजपुर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, तेजपुर-784 028, असम।

ई-मेल : [email protected]

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