सपनों का शहर मुम्बई। आमजन की कल्पनाओं, उनके सुख-दुःख और समाज के यथार्थ को रजतपट पर उतारनेवाला शहर। देश की वाणिज्यिक राजधानी। लेकिन क्या सिर्फ इतना ही!
‘बम्बई-दर-बम्बई’ इस शहर के इन जगप्रसिद्ध विशेषणों के परे जाकर इसके इतिहास और वर्तमान की अनेक परतें दिखाती है। महाराष्ट्र की राजनीति और यहाँ का जनजीवन। यहाँ का लोकेल। अँधेरी पेचीदा गलियाँ और चमचमाती सड़कें, बाजार, इमारतें। और लोग!
छोटे-छोटे किस्सों, लेखक की अपनी देखी-जानी मुम्बइया जिन्दगी के सघन विवरणों के साथ उनका अपना दृष्टिकोण; पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में मुम्बई को लेकर उनकी दिलचस्प टिप्पणियों और अन्तर्दृष्टि से समृद्ध यह किताब हमें इस शहर के लगभग हर पक्ष से अवगत करा देती है।
मुम्बई के पारसी, अंग्रेजी दौर के असरात, यहाँ के मिल-कारखाने, मजदूर, चालें और झुग्गियाँ, मुम्बई की पुलिस, दलित आन्दोलन, फिल्मी दुनिया के वे लोग जिन्हें हम लार्जर-दैन-लाइफ देखते हैं, और वे तमाम चीजें जो इस शहर को अपने आप में खास बनाती हैं, और वे भी जो अब इसकी अपनी पहचान के लिए खतरा बनती जा रही हैं—यह किताब हर उस बारीक से बारीक रेखा को पकड़ती है जिससे इस शहर का भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक नक्शा पूरा होता है।
पढ़ने में रोचक और गुनने में गहरी ‘बम्बई-दर-बम्बई'!
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2012 |
| Edition Year | 2026, Ed. 2nd |
| Pages | 327p |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 21.5 X 14 X 2 |