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Azadi Ke Baad Ka Bharat

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Azadi Ke Baad Ka Bharat

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‘आज़ादी के बाद का भारत’ देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का विस्तृत अवलोकन है। इसमें हमें न सिर्फ़ इस कालखंड की निर्णायक घटनाओं की जानकारी मिलती है, बल्कि उन्हें देखने के लिए एक सन्तुलित दृष्टिकोण भी प्राप्त होता है।

प्रो. बिपिन चंद्र और उनके सहयोगी लेखकों द्वारा लिखित चर्चित पुस्तक ‘भारत का स्वतंत्रता संग्राम’ की अगली कड़ी के रूप में प्रकाशित यह पुस्तक संविधान के निर्माण, रियासतों के एकीकरण, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के दौर में अपनाई गई राजनीतिक-आर्थिक नीतियों, पंचवर्षीय योजनाओं, हरित क्रान्ति और अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण आदि विषयों की चर्चाओं के अलावा उन समस्याओं को देखने का प्रयास भी करती है जो लम्बे औपनिवेशिक दौर के बाद आज़ाद भारत ने अपने सामने पाई, जैसे कि साम्प्रदायिकता और बड़े पैमाने पर ग़रीबी।

इस पुस्तक को विशेषतः तथ्यों की स्पष्टता, प्रामाणिकता और समग्रता के लिए जाना जाता है जिसके पीछे एक व्यापक शोध परियोजना का परिश्रम है।

विद्वानों, सामान्य पाठकों और छात्रों के बीच समान रूप से स्वीकृत ‘आज़ादी के बाद का भारत’ आधुनिक भारत को समझने और जानने के सन्दर्भ में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 712p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 4.5
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Author: Bipin Chandra

बिपि‍न चंद्र

इतिहासकार बिपिन चंद्र का जन्म हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में हुआ था। उन्होंने लाहौर के फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज और कैलिफ़ोर्निया के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में आधुनिक इतिहास के प्रोफ़ेसर थे। उन्हें ‘राष्ट्रीय प्रोफ़ेसर’ के रूप में सम्मानित किया गया। वे नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने आधुनिक भारत के सन्दर्भ में राष्ट्रवाद, उपनिवेशवाद और साम्प्रदायिकता पर कई पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत किया गया।

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