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Ashadh Ka Akhiri Din

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Ashadh Ka Akhiri Din

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आषाढ़ का आखिरी दिन कथाकार सुनील विक्रम सिंह का दूसरा कहानी संग्रह है। इस किताब का शीर्षक दिलचस्प है। मोहन राकेश का नाटक है: आषाढ़ का एक दिन और यह है आषाढ़ का आखिरी दिन ।
इस संग्रह की कहानियाँ प्रेम की सघन अनुभूति की कहानियाँ हैं। इन कहानियों में प्रकृति के रमणीय रूप मिलते हैं। आज जब बहुत-सी कहानियों में कथानक के नाम पर स्पष्टवादिता दिखलाई देती हैं, वहाँ सुनील विक्रम सिंह की कहानियाँ कल्पना का मनोरम संसार रचती हैं। इस संग्रह की कहानियों में पठनीयता है। कहानियों के संवाद मर्मस्पर्शी हैं।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 112p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 13.5 X 1
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Sunil Vikram Singh

Author: Sunil Vikram Singh

सुनील विक्रम सिंह

जन्म : 29 अप्रैल, 1969; वाराणसी जनपद की अकोढ़ा कलाँ गाँव में।

शिक्षा : प्राथमिक शिक्षा कोरापुट (ओड़िसा) जनपद के जामपुर शहर तथा गाँव की प्राथमिक पाठशाला से। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. तथा एम.ए., जे.आर.एफ./नेट परीक्षा उत्तीर्ण। बी.एच.यू. से पीएच.डी. की उपाधि।

प्रमुख कृतियाँ : ‘काँपता हुआ इन्द्रधनुष’ (उपन्यास); ‘तेरी कुड़माई हो गई?’ (कहानी-संग्रह); ‘हिन्दी साहित्य का कथेतर गद्य’ (समीक्षा); ‘मॉरिशस का कथा-साहित्य और अभिमन्यु अनत’, ‘आधुनिक हिन्दी साहित्य’, ‘प्रहलाद रामशरण : मॉरिशस में हिन्दी साहित्य के अनन्य साधक’ आदि प्रकाशित।

सम्मान : ‘प्रतापनारायण युवा साहित्य सम्मान’, ‘काव्यमित्र सम्मान’, ‘हिन्दी सेवी सम्मान’ से विभूषित।

सम्प्रति : साहित्यिक संस्था ‘संचेतना’ के संस्थापक और ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ जौनपुर के अध्यक्ष।

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