Ajney Sanchayita

Literary Criticism,Poetry,Fiction : Stories,Anthology,Prose
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ISBN:9788126703791
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Ajney Sanchayita
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अगर स्वतंत्रता को बीसवीं शताब्दी की एक बीज अवधारणा मानें तो जिन मूर्धन्य और कालजयी लेखकों ने इस अवधारणा को अपने सृजन, विचार और आयोजन का केन्द्र बनाया, उनमें अज्ञेय का स्थान ऊँचा और प्रमुख हैं। हिन्दी को उसकी आधुनिकता और भारतीय स्वरूप देने में भी अज्ञेय की भूमिका केन्द्रीय रही है। उनकी यह शीर्षस्थानीयता और केन्द्रस्थानीयता उन्हें न सिर्फ़ हिन्दी बल्कि समूचे भारतीय साहित्य का एक क्लैसिक बनाती है। स्वतंत्रता और अपने आत्मबोध के अन्वेषण और विन्यास के लिए अज्ञेय ने साहित्य की शायद ही कोई विधा होगी जिसमें न लिखा हो। उन सभी में अर्थात् कविता, कहानी, उपन्यास, आलोचना, यात्रा-वृत्तान्त, ललित निबन्ध, डायरी, सम्पादन में उनका कृतित्व श्रेष्ठ कोटि का है। हिन्दी में उनसे पहले और बाद में भी कोई और साहित्यकार नहीं हुआ है जो इतनी सारी विधाओं में सक्रिय रहा है और जिसने उनमें से हरेक में शीर्षस्थानीयता हासिल की हो। हिन्दी में आधुनिकता, नई कविता और प्रयोगवाद आदि अनेक प्रवृत्तियों के अज्ञेय प्रमुख स्थापित और अवधारक भी रहे हैं। उनके विपुल और विविध कृतित्व से यह पाठमाला उनकी कुछ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण, विचारोत्तेजक और प्रतिनिधि रचनाओं को एकत्र करने का यत्न है। इसके पीछे यह विश्वास है कि यह संचयन अज्ञेय के संसार के प्रति नई जिज्ञासा उकसाकर पाठकों को उनके विपुल साहित्य और विचार के साक्षात्कार और रसास्वादन के लिए प्रेरित करेगा। अज्ञेय-साहित्य के मर्मज्ञ और प्रसिद्ध-आलोचक नन्दकिशोर आचार्य ने पूरी ज़‍िम्मेदारी, समझ और रसिकता के साथ यह संचयन किया है जिससे इस पाठमाला का महत्त्व और भी बढ़ जाता है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2001
Pages 495p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Editorial Review

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Agyey

Author: Agyey

अज्ञेय

एक ऐसा नाम—जिससे न सिर्फ हिन्दी साहित्य बल्कि पूरा भारतीय साहित्य समृद्ध होता है। बीसवीं शताब्दी के एक ऐसे कालजयी रचनाकार जिन्होंने अपने युग की प्रवृत्तियों को अपने 'विजन’ से सम्पूर्णता में प्रभावित किया। 'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’, 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ सहित कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित अज्ञेय ने कविता, कहानी, उपन्यास, यात्रा-वृत्तान्त, आलोचना, निबन्ध, संस्मरण, डायरी, नाटक, चिन्तन आदि विधाओं में प्रचुर लेखन किया है। उन्होंने कई समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और पुस्तकों का सम्पादन कर $कलम और कला का एक श्रेष्ठ मानदण्ड भी स्थापित किया। जन्म : 7 मार्च, 1911 निधन : 4 अप्रैल, 1987

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