Adab Mein Baaeen Pasli : Afro-Asiayi Kahaniyan : Vol. 2

Fiction : Stories
Author: Nasira Sharma
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Adab Mein Baaeen Pasli : Afro-Asiayi Kahaniyan : Vol. 2-6
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हर तरह के शोषण के प्रति विद्रोह दरअसल लेखक के ख़मीर में उसकी ख़ुदादाद सलाहियतों के साथ गुँथा होता है। उसका विद्रोह हर उस बन्धन से होता है जो इंसान के दु:ख का कारण बने। वह बाहर की भौतिक दुनिया से ज़्यादा इंसान के अन्दर फैले भावना के संसार को समझने में डूबा होता है और उसी की वकालत करता है और अपने लेखन द्वारा उसका मुक़दमा लड़ता है।

वर्तमान समय में सियासत भी इंसानी दु:ख का बहुत बड़ा कारण बन चुकी है। यह जानकर पाठकों को आश्चर्य होगा कि कुछ देशों में टाइपराइटर रखना, ज़ि‍रॉक्स कॉपी बनाना, फ़ोटो कॉपी करवाना अपराध के दायरे में आता है। राजनीति लेखक पर कड़ी नज़र रखती है। इसके अलावा कुछ परिवार विशेषकर पति अकसर पत्नियों को लेखन की इजाज़त नहीं देते हैं।

इस पुस्तक के पन्नों में विश्वस्तर के लेखकों की कहानियों के ज़रिए जो प्रश्न उठाए गए हैं, वे मानव समाज के बुनियादी प्रश्न हैं जो किसी भी देश और समाज के हो सकते हैं। प्रश्न के साथ इसमें साहित्य की मानी हुई रचनाओं की भी उपस्थिति दर्ज है जो कहानी की तराश, भाषा-शैली, शिल्प को भी दर्शाती है।

कहानियों में एक-सी समस्या, एक-सी संवेदना, एक जैसी ही बेबसी और कशमकश है। कभी रोटी की परेशानी तो कभी राजनीतिक दबाव, तो कभी अंकुश की घुटन, तो कभी इंसानी रिश्तों का उलझाव। लेकिन उनसे निबटने के अपने तरीक़े हैं। इन सभी देशों में उन लेखकों की स्थिति अधिक शोचनीय है जो सत्ताविरोधी हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2017
Edition Year 2017, Ed. 1st
Pages 424P
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
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Editorial Review

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Nasira Sharma

Author: Nasira Sharma

नासिरा शर्मा

नासिरा शर्मा का जन्म सन् 1948 में इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने फ़ारसी भाषा और साहित्य में एम.ए. किया। हिन्‍दी, उर्दू, अंग्रेज़ी, पश्तो एवं फ़ारसी पर उनकी गहरी पकड़ है। वह ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य, कला व संस्कृति की विशेषज्ञ हैं। इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान व भारत के राजनीतिज्ञों तथा प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों के साथ उन्होंने साक्षात्कार किए, जो बहुचर्चित हुए। ईरानी बुद्धिजीवियों पर जर्मन व फ़्रांसीसी दूरदर्शन के लिए बनी फ़िल्म में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जनात्मक लेखन में प्रतिष्ठा प्राप्त करने के साथ ही स्वतंत्र पत्रकारिता में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है।

प्रमुख कृतियाँ : उपन्यास‘सात नदियाँ एक समन्दर’, ‘शाल्मली’, ‘ठीकरे की मंगनी’, ‘ज़िन्दा मुहावरे’, ‘कुइयाँ जान’, ‘ज़ीरो रोड’, ‘अक्षयवट’, ‘अजनबी ज़जीरा’, ‘पारिजात’, ‘काग़ज़ की नाव’, ‘शब्द पखेरू’, ‘दूसरी जन्नत’; कहानी-संग्रह‘शामी काग़ज़’, ‘पत्थर गली’, ‘संगसार’, ‘इब्ने मरियम’, ‘सबीना के चालीस चोर’, ‘ख़ुदा की वापसी’, ‘बुतख़ाना’, ‘दूसरा ताजमहल’, ‘इनसानी नस्ल’; ‘अफ़ग़ानिस्तान : बुज़कशी का मैदान’ (सम्पूर्ण अध्ययन दो खंडों में), ‘मरजीना का देश इराक़’; लेख-संग्रह‘राष्ट्र और मुसलमान’, ‘औरत के लिए औरत’, ‘औरत की दुनिया’, ‘वो एक कुमारबाज़ थी’, ‘औरत की आवाज़’; रिपोर्ताज‘जहाँ फौव्वारे लहू रोते हैं’; संस्मरण‘यादों के गलियारे’; अनुवाद‘शाहनामा फ़िरदौसी’, ‘गलिस्तान-ए-सादी’, ‘क़िस्सा जाम का’, ‘काली छोटी मछली’, ‘पोयम ऑफ़ प्रोटेस्ट’, ‘बर्निंग पायर’, ‘अदब में बाईं पसली’; आलोचना‘किताब के बहाने’, ‘सबसे पुराना दरख़्त’; विविध‘जब समय बदल रहा हो इतिहास’।

‘साहित्‍य अकादेमी पुरस्‍कार’, ‘व्‍यास सम्‍मान’, ‘अन्‍तरराष्‍ट्रीय इन्‍दु शर्मा कथा सम्‍मान’ आदि से सम्‍मानित।

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