Adab Mein Baaeen Pasli : Afro-Asiayi Kavitayen : Vol. 1

Poetry
Author: Nasira Sharma
As low as ₹636.00 Regular Price ₹795.00
You Save 20%
In stock
Only %1 left
SKU
Adab Mein Baaeen Pasli : Afro-Asiayi Kavitayen : Vol. 1
- +

पिछले पन्द्रह-बीस साल से जो माहौल बन रहा था, उससे यह ध्वनि निकल रही थी कि मध्यपूर्वी देशों को सख़्त ज़रूरत है बदलाव की, शिक्षा की और लोकतंत्र की। मगर जो बात छुपी हुई थी, इस प्रचार-बिगुल के पीछे कि वहाँ के बुद्धिजीवियों, रचनाकारों, कलाकारों और आम आदमी पर क्या गुज़र रही है और इन देशों के हाकिम महान शक्तियों की इच्छाओं और जनता की ज़रूरतों के बीच सन्तुलन कैसे साधते हैं और एकाएक तख़्ता पलट जाता है या फिर देश में विद्रोह उन्हीं के अंगरक्षकों द्वारा उठता है और पलक झपकते ही वह मार डाले जाते हैं। ऐसी स्थिति को वहाँ का संवेदनशील वर्ग कैसे झेलता है जो जेल में है, जलावतन है या फिर देश से भागकर अपनी जान बचाने के फ़िराक़ में है। उसके ख्‍़यालात क्या हैं? वह क्यों नहीं सरकार की आलोचना करना बन्द करते हैं और क़लम गिरवी रखकर आराम से ज़िन्दगी जीते हैं जैसे बहुत से लोग जीते हैं अपना ज़मीर बेचकर।

'अदब में बाईं पसली’ किसी नारे या स्त्री-विमर्श के एकतरफ़ा नज़रिए को लेकर आपके सामने नहीं रखी गई है, बल्कि मौजूदा दौर से उसे जोड़ दिया गया है। यह तलाश है एक-दूसरे में अपने को तलाश करने की और साथ ही उस परिवेश को समझने की जिसे ख़ुद इंसान ने इंसान के लिए दुश्वार बना दिया है।

इस पुस्तक में नए-पुराने रचनाकार एक साथ हैं। मर्द और औरत क़लमकारों की रचनाएँ आमने-सामने हैं, जो विभिन्न संवेदनाओं, बिम्बों और रूपकों से हमारा परिचय कराती हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2017
Edition Year 2017, Ed. 1st
Pages 418p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Write Your Own Review
You're reviewing:Adab Mein Baaeen Pasli : Afro-Asiayi Kavitayen : Vol. 1
Your Rating

Editorial Review

It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

Nasira Sharma

Author: Nasira Sharma

नासिरा शर्मा

नासिरा शर्मा का जन्म सन् 1948 में इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने फ़ारसी भाषा और साहित्य में एम.ए. किया। हिन्‍दी, उर्दू, अंग्रेज़ी, पश्तो एवं फ़ारसी पर उनकी गहरी पकड़ है। वह ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य, कला व संस्कृति की विशेषज्ञ हैं। इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान व भारत के राजनीतिज्ञों तथा प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों के साथ उन्होंने साक्षात्कार किए, जो बहुचर्चित हुए। ईरानी बुद्धिजीवियों पर जर्मन व फ़्रांसीसी दूरदर्शन के लिए बनी फ़िल्म में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जनात्मक लेखन में प्रतिष्ठा प्राप्त करने के साथ ही स्वतंत्र पत्रकारिता में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है।

प्रमुख कृतियाँ : उपन्यास‘सात नदियाँ एक समन्दर’, ‘शाल्मली’, ‘ठीकरे की मंगनी’, ‘ज़िन्दा मुहावरे’, ‘कुइयाँ जान’, ‘ज़ीरो रोड’, ‘अक्षयवट’, ‘अजनबी ज़जीरा’, ‘पारिजात’, ‘काग़ज़ की नाव’, ‘शब्द पखेरू’, ‘दूसरी जन्नत’; कहानी-संग्रह‘शामी काग़ज़’, ‘पत्थर गली’, ‘संगसार’, ‘इब्ने मरियम’, ‘सबीना के चालीस चोर’, ‘ख़ुदा की वापसी’, ‘बुतख़ाना’, ‘दूसरा ताजमहल’, ‘इनसानी नस्ल’; ‘अफ़ग़ानिस्तान : बुज़कशी का मैदान’ (सम्पूर्ण अध्ययन दो खंडों में), ‘मरजीना का देश इराक़’; लेख-संग्रह‘राष्ट्र और मुसलमान’, ‘औरत के लिए औरत’, ‘औरत की दुनिया’, ‘वो एक कुमारबाज़ थी’, ‘औरत की आवाज़’; रिपोर्ताज‘जहाँ फौव्वारे लहू रोते हैं’; संस्मरण‘यादों के गलियारे’; अनुवाद‘शाहनामा फ़िरदौसी’, ‘गलिस्तान-ए-सादी’, ‘क़िस्सा जाम का’, ‘काली छोटी मछली’, ‘पोयम ऑफ़ प्रोटेस्ट’, ‘बर्निंग पायर’, ‘अदब में बाईं पसली’; आलोचना‘किताब के बहाने’, ‘सबसे पुराना दरख़्त’; विविध‘जब समय बदल रहा हो इतिहास’।

‘साहित्‍य अकादेमी पुरस्‍कार’, ‘व्‍यास सम्‍मान’, ‘अन्‍तरराष्‍ट्रीय इन्‍दु शर्मा कथा सम्‍मान’ आदि से सम्‍मानित।

Read More
Books by this Author

Back to Top