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Aadhar Se Kiska Uddhar-Paper Back

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9789388933506
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‘‘रीतिका खेड़ा की किताब भारी सरकारी प्रचार के साथ सारे देश में लागू की गई विवादित आधार योजना के बारे में एक सामयिक और सटीक दस्तावेज़ है। यह बताती है कि कैसे सर्वोच्च न्यायालय और जानकारों की सलाह की अनदेखी करते हुए सरकार ने आधार कार्ड को फटाफट तमाम सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों के लिए अनिवार्य बना दिया। इससे उपजी विसंगतियों और जनता के संवैधानिक अधिकारों को पहुँचे गम्भीर नुकसान पर लेखिका ने बड़ी ईमानदारी से रोशनी डाली है। किताब हमको आधार से जमा किए गए भारतीय उपभोक्ता की बाबत अनमोल डाटा का, आगे मुनाफ़ाख़ोर बाज़ार द्वारा सम्भावित दुरुपयोग के ख़िलाफ़ चेतावनी देती है। एक जटिल विषय के सहज हिन्दी अनुवाद ने इस किताब को सरल और आमफ़हम बनाया है।’’    

—मृणाल पाण्डे

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2019
Edition Year 2019, 1st Ed.
Pages 128p
Price ₹125.00
Publisher Sarthak (An imprint of Rajkamal Prakashan)
Dimensions 19.5 X 13 X 1
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Reetika Khera

Author: Reetika Khera

रीतिका खेरा

रीत‌िका खेरा डेवलपमेंट इकोनॉमिस्ट हैं। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पी-एच.डी. की है। आई.आई.एम., अहमदाबाद में इकोनॉमिक्स और पब्लिक सिस्टम ग्रुप की सहायक प्रोफ़ेसर रही हैं। उन्होंने पिछले बीस वर्षों में ग्रामीण भारत में सामाजिक नीतियों पर शोध किया है। उनके लेख लम्बे समय से अनेक विधाओं में छपते रहे हैं। वे भारत में सरकारी नीतियों को लोगों के बीच बातचीत का हिस्सा बनाने में लगातार कार्यरत हैं।

फ़िलहाल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.), दिल्ली में अर्थशास्त्र की प्रोफ़सर हैं।

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