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Yuvaman Ki Udaan-Paper Back

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9788171198252
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अद्भुत है माननीय सम्बन्धों का ताना-बाना, जीवन-पथ के अनजाने मोड़ से गुज़रते हुए, कौन, कब, कहाँ मिले कौन जाने? इसे संयोग कहें या नियति...? यह तय नहीं है। मीठे सम्बन्धों को परिभाषा में बाँधना ज़रूरी भी नहीं है। उड़ते पलों को मुट्ठियों में क़ैद करने में भी समझदारी नहीं है। जीवन के दीर्घ प्रवाह में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है—पहला क़दम, दूसरा और फिर तीसरा...और फिर दीर्घ अनुक्रम...सर्वथा स्वाभाविक है। यह पुस्तक व्यक्तित्व विकास शृंखला की पहली कड़ी है, संवाद का यह क्रम अविच्छिन्न रहेगा।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2003
Edition Year 2009, Ed. 2nd
Pages 215p
Price ₹299.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Kiran Sood

Author: Kiran Sood

किरण सूद  

अफ़्रीका के आप्रवासी भारतीय परिवार में जन्म।

प्रारम्भिक शिक्षा लुधियाना में। उच्च शिक्षा देहरादून में। डॉ. भगवतशरण उपाध्याय के निदेशन में ‘द नॉन–एलाइन्ड लॉबी इन द यूनाइटेड नेशन्स’ पर शोधकार्य। डी.फ़िल. उपाधि के लिए ‘ग्रूमिंग फ़्यूचर सिटीजन्स : एजूकेशन एंड मास मीडिया’ विषय पर शोध।

सम्प्रति : राजनीति विज्ञान में रीडर। स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ट्रेनिंग सेन्टर एवं पंजाब नेशनल बैंक जोनल ट्रेनिंग सेन्टर एवं आयुध–निर्माणी के रीजनल ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट में व्यक्तित्व–विकास, तनाव–प्रबन्धन, कुशल प्रबन्धन आदि विषयों पर अतिथि वक्तव्य।

महिला अध्ययन, सतत शिक्षा एवं जनसंख्या शिक्षा के सन्दर्भ में विशेष कार्य।

‘पॉलिटिक्स इण्डिया’, ‘धर्मयुग., ‘मनोरमा’, ‘कादम्बिनी’, ‘इंडिया टुडे’ आदि पत्रिकाओं में लेख, कहानी एवं कविताएँ प्रकाशित। अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार, कार्यशाला एवं संगोष्ठियों का आयोजन तथा भागीदारी।

अष्टांग योग में अटूट विश्वास एवं निरन्तर अभ्यास।

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