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Vedic Log : Unka Itihas Aur Bhugol

Author: Rajesh Kochhar
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Vedic Log : Unka Itihas Aur Bhugol

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क्या ऋग्वेद की रचना अफगानिस्तान में हुई थी?

क्या किसी समय घग्गर नदी ही ऋग्वेद में वर्णित महान सरस्वती थी?

क्या ऋग्वैदिक जन और हड़प्पा निवासी समान ही थे?

क्या राम की अयोध्या भारत में ही थी?

प्राचीन भारतीय इतिहास के इन निर्णायक प्रश्नों के उत्तर इस किताब ‘वैदिक लोग’ में मिलते हैं। इन प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए विख्यात खगोल-भौतिकीविद राजेश कोचर भाषाविज्ञान, साहित्य, प्राकृतिक इतिहास, पुरातत्व, प्रौद्योगिकी के इतिहास, भू-आकृति विज्ञान और खगोलशास्त्र आदि अनेक क्षेत्रों से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण और संश्लेषण करते हैं और इस क्रम में ऐसे कई विरोधाभासों को सुलझाने की कोशिश करते हैं जो पेशेवर इतिहासकारों और पुरातत्वविदों, दोनों को उलझन में डालते आए हैं।

यह तर्क देते हुए कि ऋग्वेद के ज़्यादातर हिस्से की रचना दक्षिण अफ़ग़ानिस्तान में (1700 ई.पू. के बाद), ऋग्वैदिक लोगों के पुन्जाल मैदान में प्रवेश करने और गंगा नदी के पूर्व की ओर जाने से भी बहुत पहले हुई, वे दावा करते हैं कि अपने प्रवसन के दौरान वे न सिर्फ अपने अनुष्ठान और भजन इत्यादि, बल्कि नदियों और स्थानों के नाम भी अपने साथ ले गए जिनका प्रयोग उन्होंने अपनी इच्छानुसार किया।

हर कदम पर अपनी बात को तर्कों से प्रमाणित करते हुए एक वैज्ञानिक ने इस पुस्तक को ऐसी सरल और सुबोध शैली में लिखा है कि साधारण पाठक भी इसे रुचिपूर्वक पढ़ सकते हैं, इतिहासकारों, पुरातत्वशा​स्त्रियों और भारतविदों के लिए तो यह काम उल्लेखनीय रहा ही है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 312p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2.5
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Rajesh Kochhar

Author: Rajesh Kochhar

राजेश कोचर

राजेश कोचर का जन्म 26 अक्टूबर, 1946 को हुआ था। उन्होंने 1973 में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से पी-एच.डी. की। कुछ समय पंजाब विश्वविद्यालय में ही पढ़ाया ​​फिर 1974 से 1999 तक इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ऐस्ट्रो​फ़िजिक्स में काम किया। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘द वैदिक पीपल’, ‘इं​ग्लिश एडुकेशन इन इंडिया : 1715-1835’, ‘संस्कृत एंड द ब्रिटिश एम्पायर’ और ‘एस्ट्रोनॉमी इन इंडिया : ए पर्सपेक्टिव’ (जयंत नार्लीकर के साथ)। 1991 में उन्हें ‘ब्रिटिश काउंसिल/चार्ल्स वॉलेस ट्रस्ट फ़ेलोशिप’ मिली। उन्हें ‘जवाहरलाल नेहरू फ़ेलोशिप’ (1996-97) सहित अन्य कई सम्मानों से भी सम्मानित किया गया।

13 मार्च, 2022 को उनका निधन हुआ।

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