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Shoonya Ki Jheel Mein Prem-Paper Back

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‘शून्य की झील में प्रेम’ में लौकिक प्रेम को अलौकिक प्रेम में परिवर्तित होते हुए देखना सुखद अनुभूति है। प्रेम जिसकी महिमा आदिकाल से आराध्य देवताओं से लेकर साधारण मनुष्य तक व्याप्त है जिसने भी इस धरती पर जन्म लिया और जब तक जीवित रहा।

ख़ुदेजा ख़ान

मयंक मुरारी का नवीनतम कविता-संग्रह ‘शून्य की झील में प्रेम’ विश्व के प्रेम साहित्य को नए अरमानों से सुसज्जित करने का सुपर्ण सुयत्न है जिसके महत्त्व पर ख़ुदेजा ख़ान और स्वयं कवि ने यथेष्ट प्रकाश डाला है। कुछ आरम्भिक उद्धरण इसे पूर्णता प्रदान करते हैं। इसमें मेरे जैसे पाठक के लिए कुछ भी जोड़ पाना असम्भव है। यह प्रेम का मधु है जो मौन की अपेक्षा करता है। मयंक जी सिद्धहस्त एकान्त निस्पृह साधक हैं जिनका कवि-कर्म किसी तारीफ का मोहताज नहीं। उन्होंने इन टुकड़ों में अपना हृदय-रस उड़ेल दिया है जो समस्त भारतीय मानस को रसाप्लावित करेगा। शून्य की झील इश्क और अध्यात्म के सामासिक ऐश्वर्य को इंगित करने वाला प्रतीक बन मयंक मुरारी की काव्य-साधना का महत्तम राग बन जाती है। इसी के साथ वे न केवल हिन्दी बल्कि सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप के उन सारस्वत कवियों के शिरोमणि बनने की ओर अग्रसर हैं जो इश्क़ के रूहानी और डिवाइन तत्वों का प्रतिनिधित्व करने की सामर्थ्य रखते हैं। प्रत्येक टुकड़े की शिरोरेखा की भाँति प्रदत्त गद्य मुखड़े पूरी पुस्तक को नई रश्मियों से आलोकित करते हैं। यह पुस्तक सहृदय पाठकों का हृदय हार बने, यही कामना है। अस्तु।

—अरुण कमल

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 216p
Price ₹350.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Mayank Murari

Author: Mayank Murari

मयंक मुरारी

मयंक मुरारी ने राजनीतिशास्त्र में स्नातकोत्तर किया। उन्होंने ग्रामीण विकास, प्रबन्धन, जनसम्पर्क एवं पत्रकारिता का अध्ययन भी किया है।  ‘विकास के वैकल्पिक माध्यम’ विषय पर पी-एच.डी.

की है। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘मानववाद एवं राजव्यवस्था’, ‘राजनीति एवं प्रशासन’, ‘भारत : एक सनातन राष्ट्र’, ‘माई : एक जीवनी’, ‘झारखंड के अनजाने खेल’, ‘झारखंड की लोक कथाएँ’, ‘लोक जीवन : पहचान, परम्परा और प्रतिमान’, ‘यात्रा बीच ठहरे कदम’, ‘ओ जीवन के शाश्वत साथी’, ‘पुरुषोत्तम की पदयात्रा’, ‘अच्छाई की खोज’, ‘भगवा ध्वज’, ‘जंबूद्वीपे भरतखंडे’, ‘दिव्य जीवन’, ‘सनातन उत्सव का देश’, ‘The Tribal Braveheart’ आदि शामिल हैं। इसके अलावा आध्यात्मिक और भारतीय दर्शन पर आधारित उनके आलेख देश के सभी प्रतिष्ठित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं। वे व्यक्तित्व विकास, प्रेरणा और संवाद के अलावा भारतीय परम्परा एवं जीवन पर विभिन्न विद्यालयों एवं संस्थानों में नियमित तौर पर व्याख्यान भी देते हैं।

उन्हें झारखंड विधानसभा के ‘सृजन सम्मान’, ‘तुलसी सम्मान’, ‘शब्द शिल्प सम्मान’, ‘प्रभात खबर सम्मान’, ‘विद्या वाचस्पति’, ‘झारखंड गौरव सम्मान’, ‘सिद्धनाथ कुमार स्मृति सम्मान’, ‘झारखंड रत्न’, ‘जयशंकर प्रसाद स्मृति सम्मान’, ‘साहित्य अकादेमी रामदयाल मुंडा कथेतर सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। समाज सेवा के लिए उन्हें ‘लायंस क्लब ऑफ राँची’ समेत अन्य संस्थाओं द्वारा भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

ई-मेल : [email protected]

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