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Sharmnak-Paper Back

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9788126711215
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बांग्लादेश के आठवें संसदीय चुनाव के दौरान और उसके तुरन्त बाद वहाँ के हिन्दू समुदाय पर अत्याचार-उत्पीड़न का जो दौर चला, सलाम आज़ाद की यह औपन्यासिक कृति उसी का दस्तावेज़ है। बांग्लादेश बनने के बाद वहाँ के हिन्दू कई बार अत्याचार के शिकार हुए हैं लेकिन इस बार सुनियोजित ढंग से उन पर अत्याचार-उत्पीड़न का जो चक्र चला, उसके आगे पिछली घटनाएँ नगण्य हैं। बांग्लादेश से हिन्दुओं को नेस्तनाबूद कर वहाँ उग्र इस्लामी तथा तालिबानी राजसत्ता क़ायम करने के मक़सद से इस्लामी कट्टरपंथियों की मदद से बने चार दलीय गठबन्धन की छत्रच्छाया में हिन्दू नागरिकों पर चौतरफ़ा अत्याचार किया गया। पिता के सामने बेटी के साथ और माँ-बेटी को पास-पास रखकर बलात्कार किया गया। बलात्कारियों की पाशविकता से सात साल की बच्ची से लेकर साठ साल की वृद्धा तक को रिहाई नहीं मिली। लेकिन क्यों और कहाँ से आई यह बर्बरता? एक समुदाय के ख़िलाफ़ क्यों चला यह अत्याचार का दौर?—इसी का जवाब ढूँढ़ा गया है इस उपन्यास में।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Kumkum Kar
Editor Not Selected
Isbn 10 8126711213
Publication Year 2003
Edition Year 2003, Ed. 1st
Pages 99p
Price ₹50.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Salam Azad

Author: Salam Azad

सलाम आज़ाद

जन्म : 10 जुलाई, 1964 को बांग्लादेश के विक्रमपुर ज़िले के दामला गाँव में।

शिक्षा : सर जे.सी. बोस इंस्टीट्यूशन के मेधावी छात्र रहे। बाद में गाइबाँधा गवर्नमेंट कॉलेज और ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई-लिखाई की।

कुछ समय तक पत्रकारिता करने के बाद सम्प्रति बांग्लादेश की एक ग़ैर-सरकारी संस्था ‘एमिटी फ़ॉर पीस’ में कार्यरत।

प्रमुख कृतियाँ : बांग्ला में—‘विज्ञानी जगदीश चन्द्र बसु : जीवन ओ गवेषणा’, ‘रवीन्द्रनाथ जे भावे लिखतेन जेमन करे लिखतेन’, ‘देश त्याग : साम्प्रतिक भावना’, ‘महापुरुष विशुद्धानन्द महाथेरो’, ‘रवीन्द्रनाथ के लेखा जगदीश चन्द्र बसु पत्रावली’, ‘श्वेतपत्र’, ‘विश्वकविर सोनार बांग्ला’, ‘शान्तिवाहिनी ओ शान्ति चुक्ति’, ‘पार्वत्य चट्टग्राम प्रसंग’, ‘चुक्ति उत्तर पार्वत्य चट्टग्राम ओ आदिवासी प्रसंग’, ‘नजरुल स्मारक ग्रन्थ’, ‘जीवनानन्द दास स्मारक ग्रन्थ’, ‘बांग्लादेशेर बिपन्न संखालघु’, ‘बंगबन्धु जेनेभा ओ अन्यान्य’, ‘अन्नदा शंकर राय बांग्लादेश ओ बंगबंधु’, ‘आदिवासीदेर भाषा’, ‘मानवाधिकार प्रसंगे रवीन्द्रनाथ’, ‘रवीन्द्र भुवने बंगलादेश’, ‘तसलीमा नसरीन ओ अन्यान्य’, ‘बांगलादेशेर आदिवासी अस्तित्वेर संकट’, ‘बंगलादेशे मदरसा शिक्षा’; अंग्रेज़ी में—‘एट्रोसिटीज़ ऑन द माइनोरिटीज़ इन बंगलादेश’, ‘कंट्रीब्यूशन ऑफ़ इंडिया इन द वार ऑफ़ लेबरेशन ऑफ़ बंगलादेश’।

हिन्दी में अनूदित—‘बांग्लादेश से क्यों भाग रहे हैं हिन्दू’, ‘शर्मनाक’, ‘देश-विभाजन की कहानियाँ’, ‘टूटा मठ’, ‘बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार’, ‘कल्पना चकमा’, ‘नो-मैन्स लैंड’, ‘बांग्लादेश के पीड़ित अल्पसंख्यक’, ‘युद्ध शिशु’।

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