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Sampatti ka Srijan-Hard Cover

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9788126715077
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सन् 1868 में जमशेतजी टाटा ने एक व्यापारिक कम्पनी की शुरुआत की तो शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि वे आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। जमशेतजी के सामने यह स्पष्ट था कि भारत के औद्योगिक विकास के लिए तीन घटक सबसे महत्त्वपूर्ण हैं : पहला इस्पात, दूसरा हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर और तीसरा तकनीकी शिक्षा और शोध। आज लगभग डेढ़ सदी बाद टाटा परिवार दावा कर सकता है कि उन्होंने अपने संस्थापक के सपनों को पूर्णतया साकार किया है।

लेकिन सफलता की यह मंज़िल आसान नहीं रही है। इस पुस्तक में पहली बार हम जान पाते हैं कि 1992 के आर्थिक सुधारों के बाद, कम्पनी ने किस प्रकार अपना रास्ता बनाया। पुस्तक का उपसंहार स्वयं रतन टाटा ने लिखा है और इसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से, सहकर्मियों के प्रतिरोध समेत, उन तमाम कठिनाइयों के बारे में बताया है जिनका सामना उन्हें नई परिस्थितियों के अनुसार ढलने में करना पड़ा।

यह बहुपठित और बहुचर्चित पुस्तक हमें विस्तार से बताती है कि भारतीय राष्ट्र के निर्माण में, न सिर्फ़ उद्यमी के रूप में बल्कि फैक्टरी सुधारों, श्रम एवं सामाजिक कल्याण, औषधीय शोध, उच्च-शिक्षा, संस्कृति-कला और ग्रामीण विकास आदि क्षेत्रों में अपने योगदान के रूप में भी टाटा ने कितनी अहम भूमिका निभाई है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Suresh Uniyal
Editor Not Selected
Publication Year 2008
Edition Year 2008, Ed. 1st
Pages 308p
Price ₹450.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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R.M. Lala

Author: R.M. Lala

आर.एम. लाला

रूसी एम. लाला ने अपने कार्यकाल का प्रारम्भ 1948 में 19 वर्ष की आयु में पत्रकारिता से किया। 1959 में वे लन्दन में प्रथम भारतीय पुस्तक प्रकाशन-गृह के प्रबन्धक बने और 1964 में उन्होंने (राजमोहन गांधी के साथ मिलकर) ‘हिम्मत वीकली’ की नींव रखी, जिसका उन्होंने एक दशक तक सम्पादन किया। उनकी प्रथम पुस्तक ‘द क्रिएशन ऑफ़ वेल्थ’, 1981 में प्रकाशित हुई जिसका प्रकाशकीय एवं व्यावसायिक दोनों ही दृष्टि से अप्रत्याशित स्वागत हुआ। इसके बाद कई अन्य पुस्तकें आईं जिनमें ‘बियोंड द लास्ट ब्लू माउंटेन : ए लाइफ़ ऑफ़ जे.आर.डी. टाटा’ (1992), ‘सेलीब्रेशन ऑफ़ द सैल्स : लैटर्स फ्रॉम ए कैंसर सरवाइवर’ (1999), ‘ए टच ऑफ़ ग्रेटनेस : एनकाउंटर्स विद द ऐमिनेंट’ (2001), ‘फ़ॉर द लव ऑफ़ इंडिया : द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ़ जमशेत जी टाटा’ (2004), ‘इन सर्च ऑफ़ इथिकल लीडरशिप’ (2005) और ‘रोमांस ऑफ़ टाटा स्टील’ (2007) सम्मिलित हैं।

रूसी एम. लाला की पुस्तकों का अन्य भाषाओं, जिनमें जापानी भी शामिल है, अनुवाद हो चुका है। वे अठारह वर्षों तक टाटाओं के प्रमुख न्यास, सरदोराब जी टाटा ट्रस्ट के निदेशक रहे। वे सेंटर फ़ॉर एडवांसमेंट ऑफ़ फ़िलेन्थ्रॉपी के सह-संस्थापक रहे, और 1993 से इसके अध्यक्ष हैं।

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