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Ratna-Kangan Tatha Anya Kahaniyan-Paper Back

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9789360867065
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कुप्रिन के पास समाज के हर तबक़े के पात्र के लिए अचूक अन्तर्दृष्टि थी और था एक स्पष्ट उद्देश्य—यथार्थ का अविकल अंकन और अन्याय का प्रतिरोध। वे अपनी कहानियों में हर तरह की विषमता को बड़ी संवेदनशीलता से रेखांकित करते हैं। प्रस्तुत संग्रह की कहानियाँ इसका मुकम्मल उदाहरण है। इसकी शीर्षक-कथा ‘रत्न-कंगन’ एक क्लर्क के एक राजसी महिला से एकतरफा प्रेम की कहानी है जो धीरे-धीरे उदात्त प्रेम पर लम्बे चिन्तन के आख्यान में बदल जाती है।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Nirmal Verma
Editor Not Selected
Publication Year 2024
Edition Year 2024, Ed. 1st
Pages 240p
Price ₹299.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1.5
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Aleksandr Kuprin

Author: Aleksandr Kuprin

अलेक्सांद्र कुप्रिन

अलेक्सांद्र कुप्रिन (1870-1938) का जन्म रूस में हुआ था। साधारण लोगों ​का जीवन उनकी रचनाओं के केन्द्र में है। तोल्स्तोय ने उन्हें चेख़ॅव का उत्तराधिकारी घोषित किया था। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘मलोच’, ‘ओलेस्या’, ‘रत्न-कंगन’ आदि हैं। सन् 1919 में बोल्शेविक क्रान्ति के दौरान वे देश छोड़कर फ्रांस चले गए और अगले 17 साल वहीं रहे। 1937 में, अपनी मृत्यु से केवल एक वर्ष पहले, वह रूस वापस लौटे। आज कुप्रिन रूस के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखकों में से हैं।

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