चन्द्रकान्ता उन विरल लेखिकाओं में हैं जिन्होंने कश्मीर और पंजाब के आतंकवाद से उत्पन्न करुण मानवीय स्थितियों को रचना का केन्द्र बनाया है। वैसे भी कश्मीर हिन्दी साहित्य में उतना नहीं आया जितना आना चाहिए था। भूमंडलीकरण के इस दौर में, वैज्ञानिक अभिज्ञानों के आलोक में टूटते-चरमराते स्त्री-पुरुष यौन-सम्बन्ध और इतर द्वन्द्वात्मकताएँ इनके लेखन के उपजीव्य रहे हैं।
लेखिका की कहानियों का अनुभव-वृत्त अत्यन्त विस्तृत है। ये कहानियाँ उस चौहद्दी का अतिक्रमण करती हैं जिसे केवल ‘महिला लेखन’ के सीमित दायरे में समेटा जाता है। इन कहानियों में काल तथा संस्कृतियों के द्वन्द्व भी सामने आए हैं।
चन्द्रकान्ता का आत्मकथन बिलकुल सही लगता है कि मनुष्य विरोधी व्यवस्था के प्रतिपक्ष में खड़ी ये कहानियाँ दोतरफा खुलने वाली खिड़कियाँ हैं...
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2007 |
| Edition Year | 2023, Ed. 2nd |
| Pages | 184p |
| Price | ₹695.00 |
| Publisher | Radhakrishna Prakashan - Remadhav |
| Dimensions | 22.5 X 14.5 X 1.5 |