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Pratinidhi kavitayein : Ramdarash Mishra-Paper Back

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लगभग एक शताब्दी वय के हिन्दी विश्व के श्रेष्ठ कवि रामदरश मिश्र का कवि व्यक्तित्व प्रारम्भ से ही अभिभूत करने वाला और हिन्दी की चिन्तन प्रक्रिया और कविता के सौन्दर्यबोध को सींचने वाला रहा है। उन्हें मिले लगभग सभी बड़े पुरस्कार भी इस बात की गवाही देते हैं। कविता की बुनियादी ज़मीन गीत, कवित्त, मुक्तक में निष्णात रामदरश जी ने समय रहते नई कविता के स्थापत्य की कमान हाथ में ले ली थी और धीरे-धीरे वे अभिव्यक्ति और अन्दाजे बयां के उस शिखर पर पहुँच गए जहाँ अनुभूति और संवेदना का रसायन गाढ़ा हो उठता है। उनकी कविता में सारे मौसम अपने सौन्दर्य और संघर्ष के साथ सामने आते हैं। इसलिए आश्चर्य नहीं कि ऋतुओं पर लगभग सबसे ज्यादा कविताएँ उन्होंने लिखी हैं। ‘धरती छंदमयी होगी’ का स्वप्न देखने वाला यह कवि शताब्दी-भर के रचनात्मक समय को अपनी छाती से लगाए जैसे उसकी धड़कनों को बहुत पास से सुन रहा हो। ‘पथ के गीत’ से लेकर ‘समवेत’ तक की उनकी कविता यात्रा कविता की ऊर्ध्वमुखी यात्रा है। उसमें हमारी कवि परम्परा के साथ-साथ पिछली शताब्दी और इस सदी का समय प्रतिबिम्बित होता दिखता है। उनकी कविताओं में विश्वबन्धुता है, विराट का स्पन्दन है, जीवन के एक-एक पल को जीने की चाहत है। उनकी खूबी है कि वे एक कौंध, एक पुलक-भर से कविता रच लेते हैं और यही कौंध, पुलक, सुख, विषाद, विडम्बना और प्रश्नाकुलता उनकी कविताओं के क्रोमोज़ोम में अनुस्यूत है। यही वह कवि का सतत गंवई गार्हस्थ्य है जो यह कहने में गर्व का अनुभव करता है कि ‘हम पूरब से आए हैं’। सच कहें तो इन कविताओं में उनका समूचा कवि व्यक्तित्व समाहित है।
—ओम निश्चल

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Om Nishchal
Publication Year 2022
Edition Year 2025, Ed. 2nd
Pages 150p
Price ₹199.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 1
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Ramdarash Mishra

Author: Ramdarash Mishra

रामदरश मिश्र

रामदरश मिश्र का जन्म 15 अगस्त, 1924 को जिला गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के डुमरी गाँव में हुआ। आपने एम.ए., पी-एच.डी. की डिग्री हािसल की। आप लम्बे समय तक अध्यापन से जुड़े रहे और दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए।

आपकी प्रकाशित रचनाएँ हैं—‘पथ के गीत’, ‘बैरंग बेनाम चििट्ठयाँ’, ‘पक गई है धूप’, ‘कंधे पर सूरज’, ‘दिन एक नदी बन गया’, ‘जुलूस कहाँ जा रहा है’, ‘आग कुछ नहीं बोलती’, ‘बारिश में भीगते बच्चे’, ‘आम के पत्ते’, ‘कभी कभी इन दिनों’, ‘मैं तो यहाँ हूँ’, ‘रात सपने में’, ‘मैं तो यहाँ हूँ’, ‘समवेत’ सहित दो दर्जन काव्य कृतियाँ; ‘बाज़ार को निकले हैं लोग’, ‘हँसी ओठ पर आँखें नम हैं’ सहित कई ग़ज़ल-संग्रह; ‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’, ‘सूखता हुआ तालाब’, ‘रात का सफर’, ‘अपने लोग’, ‘आकाश की छत’, ‘आदिम राग’, ‘बिना दरवाजे का मकान’, ‘दूसरा घर’ सहित डेढ़ दर्जन उपन्यास; ‘खाली घर’, ‘एक वह’, ‘बसंत का एक दिन’, ‘आज का दिन भी’, ‘एक कहानी लगातार’, ‘फिर कब आएँगे?’, ‘अकेला मकान’, ‘विदूषक’, ‘आखिरी चिट्ठी’ सहित दो दर्जन कहानी-संग्रह; ‘कितने बजे हैं’, ‘बबूल और कैक्टस’, ‘घर-परिवेश’, ‘नया चौराहा’, ‘लौट आया हूँ मेरे देश’ (निबन्ध चयन); ‘तना हुआ इंद्रधनुष’, ‘भोर का सपना’, ‘पड़ोस की खुशबू’, ‘घर से घर तक’ (यात्रा-वृत्तांत); ‘स्मृतियों के छंद’, ‘सर्जना ही बड़ा सत्य है’ सहित कई संस्मरणात्मक कृतियाँ; सहचर है समय (आत्मकथा); ‘आस-पास’, ‘बाहर-भीतर’, ‘विश्वास जिन्दा है’, ‘अपना कमरा’ (डायरी); चौदह खंडों में रचनावली का प्रकाशन, आलोचना की ग्यारह पुस्तकें। कई चयन-संचयन।

आप ‘भारत भारती’, ‘साहित्य अकादेमी’, ‘दयावती मोदी कवि शेखर पुरस्कार’, ‘शलाका सम्मान’, ‘व्यास सम्मान’, ‘सरस्वती सम्मान’ सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं।

निधन : 31 अक्टूबर, 2025

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