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Pratinidhi Kahaniyan : Sanjeev-Hard Cover

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9788196672669
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संजीव ऐसे अकेले हिन्दी कथाकार हैं जो अपने कथानकों में तथ्यात्मक ‘एक्यूरेसी’ पर किसी समाजशास्त्री की तरह ध्यान देते हैं, उनके लिए शोध करते हैं और उन्हें पात्रों के जीवन्त अनुभव का हिस्सा बनाकर कहानी में लाते हैं।

महत्त्वपूर्ण यह कि इस प्रक्रिया में न कहीं उनकी भाषा डगमगाती है, न ही कहानी का खाका असन्तुलित होता है। उनकी कहानियों को पढ़ना जैसे एक सचमुच के समाज को सीधे-सीधे देखना है, उसके प्रामाणिक स्वरूप में। उसकी सामाजिक-राजनीतिक तमाम प्रक्रियाओं के साथ। प्रामाणिकता उनकी विशेषता है जो उनकी भाषा में भी दिखाई देती है। देशज और आंचलिक भाषाओं के शब्दों, वाक्यों का प्रयोग करते हुए भी वे उतने ही सजग रहते हैं जितने कथा-परिवेश से सम्बन्धित अन्य कारकों को कहानी में अंकित करते हुए।

उनके अनुभव संसार की परिधि भी आश्चर्यजनक हद तक व्यापक रही है जिसे वे मनुष्यता के गहरे सरोकारों से एक रचनात्मक अन्विति देते हैं। उनके यहाँ न कहीं बिखराव है, न भटकाव, न विचार के स्तर पर, न ही शिल्प के स्तर पर। उनकी कहानियों को केवल रसास्वाद के लिए नहीं, एक अध्ययन की तरह पढ़ा जाता है जिनसे हमारी संवेदनात्मक गहराई के साथ-साथ हमारा ज्ञानात्मक वलय भी विस्तृत होता है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 152p
Price ₹395.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 19 X 12.5 X 1.5
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Sanjeev

Author: Sanjeev

संजीव

मूर्धन्य कथाकार संजीव का जन्म 6 जुलाई, 1947 को सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। 38 वर्षों तक एक रासायनिक प्रयोगशाला में कार्यरत रहे। सात वर्षों तक ‘हंस’ समेत कई पत्रिकाओं का सम्पादन और स्तम्भ-लेखन किया। लगभग दो वर्षों तक महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा और अन्य विश्वविद्यालयों में अतिथि लेखक रहे।

संजीव का अनुभव-संसार विविधताओं से भरा हुआ है। साक्षी हैं उनकी प्राय: दो सौ कहानियाँ और ‘अहेर’, ‘सर्कस’, ‘सावधान! नीचे आग है’, ‘धार’, ‘पाँव तले की दूब’, ‘जंगल जहाँ शुरू होता है’, ‘सूत्रधार’, ‘आकाश चम्पा’, ‘रह गईं दिशाएँ इसी पार’, ‘फाँस’, ‘रानी की सराय’, ‘मुझे पहचानो’ आदि उपन्यास। नवीनतम कृतियाँ हैं—महात्मा जोतिबा फुले पर केन्द्रित उपन्यास ‘ज्योति कलश’, छत्रपति शाहू जी पर केन्द्रित उपन्यास ‘प्रत्यंचा’, पुरबी के अनन्य गायक महेन्द्र मिश्र पर केन्द्रित उपन्यास ‘पुरबी बयार’ और ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’। कुछ कृतियों पर फिल्में बनी हैं, कुछ की उन्होंने पटकथाएँ लिखी हैं।

उन्हें ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘कथाक्रम सम्मान’, ‘इन्दु शर्मा अन्तरराष्ट्रीय कथा सम्मान’, ‘पहल कथा सम्मान’, ‘सुधा कथा सम्मान’, ‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान’ समेत अनेक सम्मान प्रदान किए जा चुके हैं।

सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन।

सम्पर्क : [email protected]

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