इस कथाकृति में सुविख्यात उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा की कुछ ऐसी कहानियाँ दी गई हैं जिनका न केवल हिन्दी में, बल्कि समूचे भारतीय कथा-साहित्य में उल्लेखनीय स्थान है। व्यक्ति-मन की गूढ़ भावनाओं अथवा उसकी अवचेतनगत बारीकियों में पाठक को उलझाना इन कहानियों का उद्देश्य नहीं, उद्देश्य है समकालीन भारतीय समाज के संघटक अनेकानेक व्यक्ति-चरित्रों का उद्घाटन। इन्हीं चरित्रों के माध्यम से हम भारतीय समाज के प्रमुख अन्तर्विरोधों तथा उसकी ख़ूबियों और ख़ामियों से परिचित होते हैं। लगता है, हम अपने ही आसपास की जीवित सच्चाइयों और वर्गीय विविधताओं से गुज़र रहे हैं। इन कहानियों की चरित्रप्रधान विषयवस्तु और व्यंग्यात्मक भाषा-शैली प्रेमचन्दोत्तर हिन्दी-कहानी के एक दौर की विशिष्ट पहचान है। इस दृष्टि से इन कहानियों का ऐतिहासिक महत्त्व भी है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back, Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 1983 |
| Edition Year | 2025, Ed. 13th |
| Pages | 164p |
| Price | ₹199.00 |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 18 X 12 X 1 |
Author: Bhagwaticharan Verma
भगवतीचरण वर्मा
जन्म : 30 अगस्त, 1903; उन्नाव ज़िले (उ.प्र.) का शफीपुर गाँव।
शिक्षा : इलाहाबाद से बी.ए., एल.एल.बी.।
प्रारम्भ में कविता-लेखन। फिर उपन्यासकार के नाते विख्यात। 1933 के क़रीब प्रतापगढ़ के राजा साहब भदरी के साथ रहे। 1936 के लगभग फ़िल्म कार्पोरेशन, कलकत्ता में कार्य। कुछ दिनों ‘विचार’ नामक साप्ताहिक का प्रकाशन-सम्पादन। इसके बाद बम्बई में फ़िल्म-कथालेखन तथा दैनिक ‘नवजीवन’ का सम्पादन। फिर आकाशवाणी के कई केन्द्रों में कार्य। बाद में, 1957 से मृत्यु-पर्यन्त स्वतंत्र साहित्यकार के रूप में लेखन। ‘चित्रलेखा’ उपन्यास पर दो बार फ़िल्म-निर्माण और ‘भूले-बिसरे चित्र’ ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित। ‘पद्मभूषण’ तथा राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त।
प्रकाशित पुस्तकें : ‘अपने खिलौने’, ‘पतन’, ‘तीन वर्ष’, ‘चित्रलेखा’, ‘भूले-बिसरे चित्र’, ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’, ‘सीधी सच्ची बातें’, ‘सामर्थ्य और सीमा’, ‘रेखा’, ‘वह फिर नहीं आई’, ‘सबहिं नचावत राम गोसाईं’, ‘प्रश्न और मरीचिका’, ‘चाणक्य’, ‘थके पाँव’, ‘युवराज चूण्डा’, ‘धुप्पल’ (उपन्यास); ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘मेरी कहानियाँ’, ‘मोर्चाबन्दी’ तथा ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘मेरी कविताएँ’, ‘सविनय और एक नाराज कविता’ (कविता-संग्रह); ‘मेरे नाटक’, ‘वसीयत’, ‘सम्पूर्ण नाटक’ (नाटक); ‘अतीत के गर्त में’, ‘कहि न जाय का कहिए’ (संस्मरण); ‘साहित्य के सिद्धान्त तथा रूप’ (साहित्यालोचन); ‘भगवतीचरण वर्मा रचनावली’—14 खंड (सम्पूर्ण रचनाएँ)।
निधन : 5 अक्टूबर, 1981
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