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Pankhwali Naav-Paper Back

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पंकज बिष्ट अपनी पीढ़ी के सम्भवतः अकेले ऐसे लेखक हैं जिनकी रचनाओं में हमारे समकालीन समाज के बदलते नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक मूल्यों की पड़ताल की कोशिश इतने बड़े पैमाने पर नज़र आती है। उनकी रचनाओं का सरोकार मुख्यतः नैतिक पक्षधरता है जो आधुनिकता और परम्परा के टकरावों और परिणामों की पृष्ठभूमि में आकार लेती है। वह मानव सम्बन्धों को किस संवेदनशीलता, समझ और सहृदयता से अभिव्यक्त करते हैं, उनकी रचनाएँ इसका प्रमाण हैं। ये रचनाएँ व्यक्ति और समाज के आपसी सम्बन्धों की टकराहट और उससे उपजी जटिलताओं की कई अन्तरधाराओं को अनजाने ही पूरी संश्लिष्टता में अभिव्यक्त करती चलती हैं। यह छोटा-सा उपन्यास ‘पंखवाली नाव’ उसी परम्परा की अगली कड़ी है। इसमें यौनिकता से सम्बन्धित नैतिकता-अनैतिकता के कई सवालों से पाठक रूबरू होते हैं। यौन सम्बन्धों के दबावों और उनके भटकावों जैसे नाजुक और संवेदनशील विषय को लेकर लिखी गई यह रचना मूलतः मानवीय प्रकृति की पड़ताल करने के साथ ही साथ विषय की नवीनता, लेखकीय अन्तर्दृष्टि, वस्तुनिष्ठता और मार्मिकता के लिए विशिष्ट कही जा सकती है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2022
Edition Year 2022, Ed. 1st
Pages 128p
Price ₹199.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Pankaj Bisht

Author: Pankaj Bisht

पंकज बिष्ट

जन्म : 20 फरवरी, 1946

भारत सरकार की सूचना सेवा के दौरान ‘योजना’ अंग्रेज़ी में सहायक सम्पादक, आकाशवाणी के अंग्रेज़ी समाचार प्रभाग में समाचार सम्पादक व संवाददाता, फ़िल्म प्रभाग में पटकथा लेखक तथा आजकल का सम्पादन।

1998 में स्वैच्छिक अवकाश।

पहली कहानी 1967 में ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ में छपी।

कहानी-संग्रह : ‘पन्द्रह जमा पच्चीस’, ‘बच्चे गवाह नहीं हो सकते?’, ‘टुंड्रा प्रदेश तथा अन्य कहानियाँ’, चर्चित कहानियाँ, ‘शताब्दी से शेष’ आदि।

उपन्यास : ‘लेकिन दरवाज़ा’, ‘उस चिड़िया का नाम’ और ‘पंखवाली नाव’।

बाल उपन्यास : ‘गोलू और भोलू’।

लेख संग्रह : हिन्दी का पक्ष, कुछ सवाल कुछ जवाब।

भारत की लगभग सभी मुख्य भाषाओं के अलावा अंग्रेज़ी तथा कुछ यूरोपीय भाषाओं में अनुवाद। साहित्य, संस्कृति व मीडिया के अलावा राजनीतिक विषयों पर लगातार लेखन।

1999 से समयांतर का मासिक रूप में पुनर्प्रकाशन और सम्पादन।

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