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Meghdoot : Ek Antaryatra-Hard Cover

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‘मेघदूत’ एक कालजयी कृति ही नहीं प्रेम, प्रकृति और निसर्ग के प्रति कालिदास की अनन्य प्रपत्ति भी है। अपने विशिष्ट स्वर, स्वरूप और न्यास में यह काव्य एक अप्रतिम एवं इन्द्रधनुषी भाव-वितान है, जिसमें कृतिकार की अपूर्व परिकल्पना, मौलिक उद्भावना तथा बिम्बों और वर्णों की जीवन्त छवियाँ सहज ही देखी जा सकती हैं।

कालिदास ने अपनी यशस्वी कृति ‘मेघदूत’ के द्वारा जिस रूपक-राज्य का निर्माण किया था—पिछली दो सहस्राब्दियों से उसका निरन्तर विकास और विस्तार होता रहा है। विरही यक्ष के मनोजगत में विद्यमान एक आर्तप्रेमी के प्रणयोत्सुक प्रार्थी भाव को अनुषंग बनाकर—अपनी प्राण-प्रियतमा को भेजे जानेवाले विरहातुर सन्देश को कई रचनाकारों, भाष्यकारों और रूपान्तरकारों और चित्रकारों ने अपने-अपने ढंग से, अलग-अलग शैलियों में निरूपित किया है। प्रसंगानुरूप और प्रसंगान्तर परिदृश्य को अपने विरहकातर निवेदन से मुखर करनेवाली इस कालातीत रचना का अनुगायन और अनुकीर्तन न केवल सदियों से होता रहा है, बल्कि आधुनिक और समकालीन पीढ़ियाँ भी इसमें अपनी रचनात्मक भावांजलि लिए खड़ी रही हैं।

अपनी सर्जनात्मक समग्रता के नाते और ‘क्लासिकी’ के गुणों से समृद्ध एवं समादृत ‘मेघदूत’ ने काव्य और काव्येतर माध्मयों के द्वारा सहृदय पाठकों, प्रेक्षकों, गायकों और समीक्षकों की क्षमता और आकांक्षाओं के अनुरूप सुदीर्घ रचना-प्रकिया एवं परम्परा को जीवित रखा है।

इसी अनुक्रम में हिन्दी के सुपरिचित विद्वान, आलोचक, कवि एवं रचनाकार प्रभाकर श्रोत्रिय ने ‘मेघदूत’ के मार्मिक प्रसंगों, अछूते अनुषंगों—और सबसे बढ़कर—रचनाकार की विराट मनोभूमि का स्पर्श एवं अनुभावन अपनी विदग्ध रचना मनीषा के द्वारा किया है।

‘मेघदूत : एक अन्तर्यात्रा’ पुस्तक प्रेमी और प्रकृति के शाश्वत एवं चिरन्तन आधान को सुललित और सर्जनात्मक आयाम प्रदान करेगी—इसमें सन्देह नहीं।

 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Isbn 10 8171192688
Publication Year 1996
Edition Year 2022, Ed. 2nd
Pages 112p
Price ₹450.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Prabhakar Shrotriya

Author: Prabhakar Shrotriya

प्रभाकर श्रोत्रिय

जन्म : 19 दिसम्बर, 1938, प्रख्यात आलोचक, नाटककार, निबन्धकार। प्रखर सन्तुलित : दृष्टि। सर्जनात्मक भाषा और विवेचना की मौलिक भंगिमा। नई कविता का सौन्दर्यशास्त्र, नई और समकालीन  कविता  का  प्रामाणिक  मूल्यांकन, साहित्येतिहास का पुनर्मूल्यन, छायावाद, द्विवेदी-युग, प्रगतिवाद इत्यादि का नव विवेचन। दो दर्जन मौलिक और एक दर्जन सम्पादित ग्रन्थ।

प्रमुख कृतियाँ : ‘कविता की तीसरी आँख’, ‘रचना एक यातना है’, ‘जयशंकर प्रसाद की प्रासंगिकता’, ‘संवाद’ (नई कविता-आलोचना), ‘कालयात्री है कविता’, ‘अतीत के हंस : मैथिलीशरण गुप्त’, ‘प्रसाद साहित्य में प्रेमतत्त्व’, ‘हिन्दी कविता की प्रगतिशील भूमिका’, ‘शमशेर बहादुर सिंह’, ‘नरेश मेहता’, ‘सुमन : मनुष्य और सृष्टा’, ‘रामविलास शर्मा : व्यक्ति और कवि’ (आलोचना); ‘धर्मवीर भारती’ (सं.), ‘कविता की तीसरी आँख’ का अंग्रेज़ी अनुवाद ‘The Quintessence of Poetry’ (नाटक); ‘इला’, ‘साँच कहूँ तो...’, ‘फिर से जहाँपनाह’। ‘इला’ का ग्यारह भारतीय भाषाओं में अनुवाद आदि।

सम्मान : ‘अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार’ (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान), ‘अ.भा. रामकृष्ण बेनीपुरी पुरस्कार’ (बिहार सरकार, भाषा विभाग), ‘आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार’ (मध्य प्रदेश साहित्य परिषद), ‘रामेश्वर गुरु पत्रकारिता पुरस्कार’, ‘श्री शरद सम्मान’ आदि।

कार्य : निदेशक भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता; निदेशक, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली;

सम्पादक : ‘वागर्थ’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘साक्षात्कार’, ‘अक्षरा’, ‘पूर्वग्रह’।

विदेश यात्रा : नार्वे।

सदस्य : केन्द्रीय साहित्य अकादेमी, विद्या परिषद महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय।

परामर्शदाता : केन्द्रीय साहित्य अकादेमी (हूज. हू. हिन्दी), नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली लक्ष्मीदेवी ललित कला अकादमी, कानपुर।

निधन : 15 सितम्बर, 2016

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