Shreshth Bharatiya Ekanki : Vol. 2

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Shreshth Bharatiya Ekanki : Vol. 2

आज रंगमंच के उपयुक्त सशक्त नाटकों की शायद सबसे अधिक आवश्यकता है। क्योंकि टी.वी. और फ़िल्मों द्वारा फैलाए गए प्रदूषण को सशक्त नाटक ही सही चुनौती दे सकते हैं, परन्तु इस दृष्टि से वर्तमान परिदृश्य बहुत आशाजनक दिखाई नहीं पड़ता। विभिन्न भारतीय भाषाओं में अच्छे नाटकों का लगातार अभाव होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में यह बहुत आवश्यक है कि भारतीय भाषाओं में रंगमंच के योग्य उत्कृष्ट नाटकों का परस्पर आदान-प्रदान हो। इस तरह का एक प्रयत्न भारतीय भाषा परिषद् द्वारा किया गया है।

दो खंडों में प्रकाशित 'श्रेष्ठ भारतीय एकांकी’ के खंड—दो में असमिया, उर्दू, गुजराती, तमिल, तेलुगू तथा मलयालम के श्रेष्ठ एकांकी संकलित हैं। इसमें रंगमंच के उपयुक्त एकांकी ही प्रायः चुने गए हैं। विभिन्न विभागों का सम्पादन सम्बन्धित भाषाओं के अधिकारी विद्वानों द्वारा किया गया है।

उन्होंने भूमिकाओं में अपनी-अपनी भाषा के नाटक और एकांकी साहित्य के विकास और विशिष्टताओं का गहरा विवेचन किया है। इनसे पाठकों को सम्बन्धित भाषाओं के अवदान की पर्याप्त जानकारी मिल सकेगी। एकांकियों के हिन्दी अनुवाद अत्यन्त प्रामाणिक अनुवादकों द्वारा करवाए गए हैं, ताकि नाटक के कथ्य और नाट्य-भाषा दोनों की रक्षा की जा सके।

'एकांकी' विधा एक तरह से वर्तमान युग का अवदान और आन्दोलन है। अपने समय की ज्वलन्त समस्याएँ और चिन्ताएँ इनके मूल में होती हैं। ऐसी कृतियाँ एक बड़े पाठक और दर्शक समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना आज हमारे समय की माँग है।

आशा है, यह संकलन इन अर्थ में भी उपादेय होगा।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1998
Edition Year 2023, Ed. 3rd
Pages 780p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2.5
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Author: Prabhakar Shrotriya

प्रभाकर श्रोत्रिय

प्रख्यात आलोचक, नाटककार, निबन्धकार। प्रखर सन्तुलित : दृष्टि। सर्जनात्मक भाषा और विवेचना की मौलिक भंगिमा। नई कविता का सौन्दर्यशास्त्र, नई और समकालीन  कविता  का  प्रामाणिक  मूल्यांकन, साहित्येतिहास का पुनर्मूल्यन, छायावाद, द्विवेदी-युग, प्रगतिवाद इत्यादि का नव विवेचन। दो दर्जन मौलिक और एक दर्जन सम्पादित ग्रन्थ।

प्रमुख कृतियाँ : ‘कविता की तीसरी आँख’, ‘रचना एक यातना है’, ‘जयशंकर प्रसाद की प्रासंगिकता’, ‘संवाद’ (नई कविता-आलोचना), ‘कालयात्री है कविता’, ‘अतीत के हंस : मैथिलीशरण गुप्त’, ‘प्रसाद साहित्य में प्रेमतत्त्व’, ‘हिन्दी कविता की प्रगतिशील भूमिका’, ‘शमशेर बहादुर सिंह’, ‘नरेश मेहता’, ‘सुमन : मनुष्य और सृष्टा’, ‘रामविलास शर्मा : व्यक्ति और कवि’ (आलोचना); ‘धर्मवीर भारती’ (सं.), ‘कविता की तीसरी आँख’ का अंग्रेज़ी अनुवाद ‘The Quintessence of Poetry’ (नाटक); ‘इला’, ‘साँच कहूँ तो...’, ‘फिर से जहाँपनाह’। ‘इला’ का ग्यारह भारतीय भाषाओं में अनुवाद आदि।

सम्मान : ‘अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार’ (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान), ‘अ.भा. रामकृष्ण बेनीपुरी पुरस्कार’ (बिहार सरकार, भाषा विभाग), ‘आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार’ (मध्य प्रदेश साहित्य परिषद), ‘रामेश्वर गुरु पत्रकारिता पुरस्कार’, ‘श्री शरद सम्मान’ आदि।

कार्य : निदेशक भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता; निदेशक, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली;

सम्पादक : ‘वागर्थ’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘साक्षात्कार’, ‘अक्षरा’, ‘पूर्वग्रह’।

विदेश यात्रा : नार्वे।

सदस्य : केन्द्रीय साहित्य अकादेमी, विद्या परिषद महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय।

परामर्शदाता : केन्द्रीय साहित्य अकादेमी (हूज. हू. हिन्दी), नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली लक्ष्मीदेवी ललित कला अकादमी, कानपुर।

निधन : 15 सितम्बर, 2016

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