Manav Sharir Aur Rog Pratiraksha Tantra

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Manav Sharir Aur Rog Pratiraksha Tantra

मनुष्य के शरीर में भिन्न-भिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं। एक ही प्रकार की बहुत-सी कोशिकाएँ मिलकर जो संरचना बनाती हैं, उसे ऊतक कहते हैं।

एक ही तरह के बहुत से ऊतक मिलकर शरीर के अंग विशेष का निर्माण करते हैं। उदाहरणार्थ—मस्तिष्क के निर्माण में तंत्रिका कोशिकाएँ भाग लेती हैं। ये पहले ऊतक बनाती हैं और ऊतक मिलकर ही मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र का निर्माण करते हैं। इसी तरह पेशीय ऊतक, शरीर की पेशियों का निर्माण करते हैं। सम्बन्धित रचना के अनुसार ऊतकों के भी कई प्रकार होते हैं, जैसे संयोजी ऊतक, जो शरीर के अंगों को परस्पर जोड़े रखता है। अस्थि ऊतक जो अस्थियाँ बनाते हैं। उपकला ऊतक त्वचा या अंगों की ऊपरी पर्त का निर्माण करता है। बहुत से ऊतक मिलकर शरीर के अंग और विभिन्न प्रणालियाँ बनाते हैं और इन अंगों और प्रणालियों से मिलकर पूरा शरीर बनता है।

—इसी पुस्‍तक से

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Language Hindi
Format Paper Back
Edition Year 2010
Pages 63p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21 X 14 X 0.5
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Premchandra Swarnkar

Author: Premchandra Swarnkar

प्रेमचन्द्र स्वर्णकार

शिक्षा : बी.एससी., एम.बी.बी.एस., एम.डी. (पैथोलॉजी)।

प्रथम श्रेणी चिकित्सा-विशेषज्ञ (पैथोलॉजी), ‘हेल्थ एंड न्यूट्रिशन’ पत्रिका, मुम्बई के पूर्व विशेषज्ञ सलाहकार। विगत चार दशक से मानव-स्वास्थ्य एवं चिकित्सा-विज्ञान सम्बन्धी सैकड़ों लेख देश की प्रमुख स्वास्थ्य एवं पारिवारिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

प्रकाशित पुस्तकें : एड्स पर हिन्दी की पहली पुस्तक ‘महारोग एड्स’ के अलावा मानव स्वास्थ्य और चिकित्सा-विज्ञान पर 30 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। साथ ही कुछ साहित्यिक पुस्तकें—‘नहीं, यह व्यंग्य नहीं’, ‘मीटिंग चालू आहे’ और काव्य-संकलन ‘मायने बदल चुके हैं’ तथा लघु कथा-संकलन ‘टुकड़ा-टुकड़ा सच’ भी प्रकाशित।

पुरस्कार : 'डॉ. मेघनाद साहा राष्ट्रीय पुरस्कार’, 'आर्यभट पुरस्कार’, 'राजीव गांधी मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार’, ‘राजभाषा गौरव पुरस्कार’, ‘वाङ्मय पुरस्कार’, ‘डॉ. शैलेन्द्र खरे स्मृति सम्मान’ आदि।

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