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Lohia Ke Sapno Ka Bharat : Bhartiya Samajwad Ki Ruprekha-Paper Back

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9788119996063
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भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं। संविधान के उच्च आदर्शों, मूल्यों तथा प्रगतिशील प्रावधानों के बावजूद समतामूलक समाज की स्थापना लक्ष्य से मीलों दूर है। नर-नारी की असमानता, जाति-बिरादरी की गैर-बराबरी, धार्मिक समूहों का आपसी द्वेष एवं कटुता, अमीर-गरीब की गहराती खाईं, शिक्षा, स्वास्थ्य, भुखमरी एवं बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है। नौकरशाही राज्य एवं जनता के द्वारा चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारों का सामन्तवादी एवं राजशाही सोच, तौर-तरीका एवं व्यवहार बना हुआ है। संविधान के 73वें एवं 74वें संशोधनों के बावजूद भी लोकतंत्र का चौथा खम्भा, पंचायती राज, एक नकली टाँग की तरह लटका दिया गया मालूम पड़ता है। आर्थिक उदारीकरण के दौर में विकास की गति तेज हुई है, लेकिन किसानों, मजदूरों, एवं औद्योगिक श्रमिकों को उसका समुचित लाभ नहीं मिला है। सामाजिक असमानता के छुआछूत जैसे अभिशाप तो मिट रहे हैं, लेकिन आर्थिक असमानता एक नये जातिवाद को पैदा कर रही है, जिससे लोकतंत्र को सचेत रहने की आवश्यकता है। चुनावों में धन का प्रभाव तथा तदनुसार राजनीतिक दलों की पूँजीपतियों पर चुनावी खर्च के लिए निर्भरता लोकतंत्र के लिए सुखद नहीं है। एक प्रकार से, लोकतंत्र की कोख में राजनीतिक-आर्थिक कुलीनतंत्र का भ्रूण विकसित हो रहा है जिसके लोहिया जन्मजात विरोधी थे।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2024
Edition Year 2024, Ed. 1st
Pages 200p
Price ₹225.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Ashok Pankaj

Author: Ashok Pankaj

अशोक पंकज

15 नवंबर, 1970 को बिहार के जहानाबाद जिला, लाट गाँव के एक संयुक्त किसान परिवार में जन्म। गाँव के सरकारी स्कूल से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, पटना कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्व में बी.ए. ऑनर्स, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से राजनीतिशास्व में एम.ए. एवं एम.फिल.। वहीं से पीएच.डी. के दौरान नौकरी, तत्पश्चात यूजीसी फेलोशिप एवं पीएच.डी. स्थगित। बाद में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया से पीएच.डी. एवं दिल्ली विश्वविद्यालय से एल.एल.बी.। वैश्य कॉलेज, रोहतक, हरियाणा में राजनीति शास्त्र में प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष के रूप में 10 वर्षों तक लगातार शिक्षण के पश्चात् इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट में सीनियर फेलो एवं काउन्सिल फॉर सोशल डेवलपमेंट, नई दिल्ली में प्रोफेसर एवं निदेशक के रूप में कार्य।

अंग्रेजी में पाँच एवं हिन्दी में दो पुस्तकों के अलावा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में 30 से अधिक शोध-पत्र एवं 50 से अधिक पुस्तक समीक्षा प्रकाशित। अंग्रेजी में Right to Work and Rural India (2012) Sage; Subalternity, Exclusion and Social Change in India (2014) Cambridge University Press; Dalits, Subalternity and Social Change in India (2019) Routledge; Social Sector Development in North-East India (2020) Sage; and Inclusive Development Through Guaranteed Employment (2023) Springer तथा हिन्दी में लोहिया के सपनों का भारत (2024) एवं राममनोहर लोहिया : भारत की हिमालय नीति (2025) लोकभारती प्रकाशन से प्रकाशित।

सम्प्रति : काउन्सिल फॉर सोशल डेवलपमेंट में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत।

ई-मेल: [email protected]

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