Facebook Pixel

Kya-Kya Toot Gaya Bheetar-Hard Cover

Special Price ₹420.75 Regular Price ₹495.00
15% Off
In stock
SKU
9788171199983
- +
Share:
Codicon

जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं, विचारों, अपनी विवशता और व्यवस्था की अच्छी-बुरी चीज़ों को आधार बनाकर लिखी गई कविताओं का संग्रह है—‘क्या-क्या टूट गया भीतर’। कवि मनोज कुमार शर्मा ने सामाजिक टूटन की अन्तर्व्यथा को बड़ी सादगी से दर्ज किया है इन कविताओं में।

इनकी प्रतिभा इनके ‘अढ़ाये’ में परिलक्षित होती है जिसमें दो-टूक शब्दों में इन्होंने सामाजिक विद्रूपताओं और विडम्बनाओं पर व्यंग्य किया है। पाठक स्वयं पढ़कर इस बात का अन्दाज़ा लगा सकते हैं। निश्चय ही यह कविता-संग्रह पठनीय और संग्रहणीय कृति है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Isbn 10 8171199984
Publication Year 2005
Edition Year 2023, Ed. 2nd
Pages 104p
Price ₹495.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Kya-Kya Toot Gaya Bheetar-Hard Cover
Your Rating
Manoj Kumar Sharma

Author: Manoj Kumar Sharma

मनोज कुमार शर्मा

शिक्षा : ग्रामीण विकास प्रबन्धन में स्नातकोत्तर।

प्रमुख कृतियाँ : ‘क्या-क्या टूट गया भीतर’, ‘उसका तो कोई गाँव होगा ही नहीं’, ‘ये ग़लत बात है’ (कविता-संग्रह); ‘जनकप्रिया एवं अन्य कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह)।

सम्मान : राजस्थान साहित्य अकादेमी द्वारा ‘सुधीन्द्र पुरस्कार’, राजस्थान सरकार द्वारा मौलिक लेखन हेतु ‘स्टेट अवार्ड’ सहित पोयट्री सोसाइटी इंडिया, इंडो-जापान कल्चरल एवं लिटरेचरल फ़ाउंडेशन, न्यूयॉर्क में अप्रवासी भारतीयों, बीकानेर की साहित्य संस्थाओं, टोंक की साहित्य संस्थाओं, कोलकाता की चौरंगी लेन स्थित साहित्य सभा में उत्तर-पूर्व के साहित्यकारों, जोधपुर की साहित्यिक संस्था ‘सम्‍भावना’ आदि द्वारा सम्मानित।

विशेष : आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन, संयुक्त राष्ट्रसंघ, न्यूयॉर्क में भारत का प्रतिनिधित्व। यूरोप, मध्य-पूर्व एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न देशों में काव्य-पाठ। न्यूयॉर्क के आई.टी.वी. एवं मेलबॉर्न रेडियो द्वारा कविता-प्रसारण। 50 से अधिक अन्तरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय सम्मेलनों एवं सेमीनारों में प्रतिनिधित्व। राजस्थानी संगीत का एलबम पेन ऑडियो, मुम्बई द्वारा जारी।

श्री शर्मा बीकानेर में कुलपति भी रहे, अब सेवानिवृत्‍त।

 

 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top