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Kiska Hai Aasman-Hard Cover

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यह सविता भार्गव का पहला काव्य-संकलन है। इससे गुज़रना मेरे लिए एक सुखद अनुभव रहा। सविता के पास गहरा और लम्बा सर्जनात्मक धैर्य है। जिस तरह की प्रौढ़ता का धरातल इसमें दिखाई पड़ता है, वह इस बात का संकेत है कि इसके पूर्व काफ़ी शब्द-सृष्टियाँ बनती और निरस्त होती रही होंगी। कोई यशःप्रार्थी सर्जक सहज ही उन्हें छपने दे सकता था। सविता में ऐसी हड़बड़ी बिलकुल दिखाई नहीं पड़ती। संकलन तभी प्रेस में जाने दिया जब उन्हें लगा कि यह सृजन-कर्म का ऐसा पड़ाव है, जब उसे सबके सामने रखा जा सकता है। सविता की सजगता की मैं प्रशंसा करता हूँ।

विषय और रूप, दोनों दृष्टियों से प्रौढ़ कविताएँ हैं। प्रौढ़ता के भीतर तरलता का आश्चर्य में डाल देनेवाला वेग और प्रवाह।

कई रंगों की कविताएँ हैं। प्रायः सबमें सर्जक का अपना अनुभव और कई बार बेहद निजी अनुभव बोलता है। ऐसे समय में जब सृजन से निजता का लोप होता जा रहा है, सविता ने उसे थामने और अपनी अभिव्यक्ति से पुष्ट करने का प्रयास किया है।

सविता की कविता की एक बड़ी विशेषता है ‘स्पर्श गुण’ अथवा ‘स्पर्श बिम्ब’। सविता सिनेमा से भी जुड़ी हैं। यह बात शायद उसके कारण पैदा हुई हो। चलते-फिरते स्पर्शात्मक बिम्ब। ‘स्पर्श’ शृंखला की तीसरी कड़ी (स्पर्श : तीन) में मातृत्व के प्रथम अनुभव का यह विलक्षण चित्र मैं यहाँ ख़ास तौर से उद्धृत करना चाहूँगा—

ब्रह्म मुहूर्त में जन्मा था वह

जैसा बहुत मुलायम सा नन्हा सूरज

नर्स ने लाकर लिटाया था उसे मेरी बग़ल में

 

मेरी हथेलियों में अब भी थरथराता है

उसके गालों का पहला स्पर्श

मैंने छुआ था जैसे पहली बार

अपने से अलग अपने को।

—केदारनाथ सिंह

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Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2012
Edition Year 2012, Ed. 1st
Pages 104p
Price ₹200.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14 X 1
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Savita Bhargav

Author: Savita Bhargav

सविता भार्गव

प्राचीन नगरी विदिशा में 5 सितम्बर, 1968 को जन्म। हिन्‍दी साहित्य में डी.लिट्.।

कविता के अतिरिक्त थिएटर और सिनेमा में काम। कुछ आलोचनात्मक लेखन। शमशेर पर एक आलोचना पुस्तक 'कवियों के कवि शमशेर'। दो कविता-संग्रह 'किसका है आसमान' और ‘अपने आकाश में’।

सम्प्रति : विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन, भोपाल।

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