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Kalam Aaj Unki Jai Bol-Paper Back

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9789393603142
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भारत का युवा जो साहित्य का विद्यार्थी है उसे भी या जो नहीं है वह भी ऐसे महान रचनाकारों के जीवन और सृजन से परिचित कराना पुस्तक का उद्देश्य है जिन्होंने भारत की स्वाधीनता में अपना तन-मन-धन सब कुछ समर्पित तो किया ही परन्तु अपनी लेखनी से ऐसा व्यापक जन जागरण किया कि सारा देश उस स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़ा और अन्ततः अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना ही पड़ा। इस दृष्टि से इस पुस्तक में आधुनिक हिन्दी साहित्य के ऐसे 14 रचनाकारों के जीवन और सृजन पर प्रकाश डालने का प्रयत्न किया गया है जिन्होंने अपनी लेखनी के द्वारा स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लिया, जिनकी रचनाएँ भारतीय समाज को उसके स्वाभिमान, गौरव और स्वतन्त्रता के महत्त्व का बोध कराती हैं। ऐसे रचनाकारों के बारे में देश के प्रत्येक व्यक्ति को जानना आवश्यक है जिनके प्रति हम सभी भारतवासियों का कृतज्ञता भाव रखना कर्तव्य है। ऐसा नहीं कि यह विशेषता केवल इन 14 कवियों में ही थी। परन्तु पुस्तक की एक सीमा है। इसीलिए मेरी दृष्टि से जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण थे उन्हें इस पुस्तक में सम्मिलित किया गया।

 

पुस्तक में इन कवियों के जीवन और सृजन के साथ ही उनकी तीन-तीन ऐसी प्रमुख रचनाएँ भी संकलित की गई हैं जो राष्ट्रीय चेतना की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 208p
Price ₹300.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Vinamra Sen Singh

Author: Vinamra Sen Singh

विनम्र सेन सिंह

विनम्र सेन सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद में 15 नवम्बर, 1988 को हुआ। आरम्भिक शिक्षा आजमगढ़ से। स्नातक इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा स्नातकोत्तर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से 'विवेकी राय के कथेतर गद्य में आंचलिकता और लोकजीवन' पर शोध कार्य। 2016 से 2018 तक बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यापन। वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर। साहित्यिक संस्था 'नया परिमल' के संस्थापक एवं सचिव तथा 'नया परिमल' पत्रिका के सम्पादक ।
'मार्क्सवादी आलोचना का विकास' पहली पुस्तक । 'अपना भारत देश महान', 'विवेकी राय: आंचलिकता और लोक जीवन', 'कलम आज उनकी जय बोल' मौलिक पुस्तकें। 'बादलों को आईना समझो' चर्चित काव्य-संग्रह। 'श्यामल घट: अमृत कलश' का सम्पादन। 'रामचरित उपाध्याय रचनावली' एवं 'काली मिट्टी पर पारे की रेखा' का सह-सम्पादन। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शोध आलेख, कविताएँ, कहानियाँ एवं ललित निबन्ध प्रकाशित।
ई-मेल : [email protected]

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