‘हिन्दू बनाम हिन्दू’ राममनोहर लोहिया के उन लेखों, टिप्पणियों, पत्रों, साक्षात्कार आदि का संकलन है जिनका सम्बन्ध भारतीय समाज के कुछ बुनियादी मसलों से है। ये मसले हैं—जाति, योनि, सम्पत्ति और सहिष्णुता। लोहिया के अनुसार, हिन्दू धर्म सदियों से इन्हीं मसलों पर एक आन्तरिक संघर्ष में उलझा हुआ है। इस संघर्ष में एक ओर उदारवादी हैं तो दूसरी ओर कट्टरपन्थी। इसे भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई बतलाते हुए वे देश के इतिहास को इस लड़ाई के परिप्रेक्ष्य में देखने का सुझाव देते हैं। साथ ही यह चेतावनी भी देते हैं कि केवल उदारता ही देश में एकता ला सकती है।
इस पुस्तक में संकलित सामग्री छह-सात दशक पहले लिखी गई थी लेकिन इन्हें पढ़ते हुए लगता है मानो ये मौजूदा भारत की परिस्थितियों को हिसाब में ले रही हैं। धार्मिक कट्टरपन्थियों की विध्वंसक सक्रियता, धार्मिक उदारवादियों की निराशाजनक निष्क्रियता, जातिवाद की जानलेवा जकड़न और दासता के विविध रूप जैसे विभिन्न विषय आज कितने प्रासंगिक हैं यह बतलाने की जरूरत नहीं है।
यह पुस्तक लोहिया की असाधारण मेधा और दूरदृष्टि का प्रमाण है, साथ ही भारतीय समाज और संस्कृति के प्रति उनके गहन चिन्तन और मूलगामी चिन्ता का भी। वस्तुतः यह हरेक भारतीय के लिए इतिहास की संगत समझ और भविष्य के लिए सम्यक प्रेरणा देने वाली एक आवश्यक पुस्तक है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back, Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2009 |
| Edition Year | 2025, Ed. 11th |
| Pages | 114p |
| Price | ₹250.00 |
| Publisher | Lokbharti Prakashan |
| Dimensions | 21 X 13.5 X 0.5 |