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Hindu Banam Hindu-Paper Back

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9788180314056
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‘हिन्दू बनाम हिन्दू’ राममनोहर लोहिया के उन लेखों, टिप्पणियों, पत्रों, साक्षात्कार आदि का संकलन है जिनका सम्बन्ध भारतीय समाज के कुछ बुनियादी मसलों से है। ये मसले हैं—जाति, योनि, सम्पत्ति और सहिष्णुता। लोहिया के अनुसार, हिन्दू धर्म सदियों से इन्हीं मसलों पर एक आन्तरिक संघर्ष में उलझा हुआ है। इस संघर्ष में एक ओर उदारवादी हैं तो दूसरी ओर कट्टरपन्थी। इसे भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई बतलाते हुए वे देश के इतिहास को इस लड़ाई के परिप्रेक्ष्य में देखने का सुझाव देते हैं। साथ ही यह चेतावनी भी देते हैं कि केवल उदारता ही देश में एकता ला सकती है।

इस पुस्तक में संकलित सामग्री छह-सात दशक पहले लिखी गई थी लेकिन इन्हें पढ़ते हुए लगता है मानो ये मौजूदा भारत की परिस्थितियों को हिसाब में ले रही हैं। धार्मिक कट्टरपन्थियों की विध्वंसक सक्रियता, धार्मिक उदारवादियों की निराशाजनक निष्क्रियता, जातिवाद की जानलेवा जकड़न और दासता के विविध रूप जैसे विभिन्न विषय आज कितने प्रासंगिक हैं यह बतलाने की जरूरत नहीं है।

यह पुस्तक लोहिया की असाधारण मेधा और दूरदृष्टि का प्रमाण है, साथ ही भारतीय समाज और संस्कृति के प्रति उनके गहन चिन्तन और मूलगामी चिन्ता का भी। वस्तुतः यह हरेक भारतीय के लिए इतिहास की संगत समझ और भविष्य के लिए सम्यक प्रेरणा देने वाली एक आवश्यक पुस्तक है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2009
Edition Year 2025, Ed. 11th
Pages 114p
Price ₹250.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21 X 13.5 X 0.5
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Rammanohar Lohia

Author: Rammanohar Lohia

डॉ. राममनोहर लोहिया

जन्म : अकबरपुर (फ़ैज़ाबाद, उ.प्र.), 23 मार्च, 1910

शिक्षा : अकबरपुर, बनारस और कलकत्ता में। बर्लिन विश्वविद्यालय से 1933 में अर्थशास्त्र में पीएच.डी.।

1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, ‘कांग्रेस सोशलिस्ट' (अंग्रेज़ी साप्ताहिक, कलकत्ता) का सम्पादन। 1936-38 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के विदेश-सचिव। 1942 की अगस्त क्रान्ति का नेतृत्व, विशेष रूप में कांग्रेस रेडियो का संचालन। 1944 के आरम्भ में गिरफ़्तारी, लाहौर के क़िले में यातनाएँ। 1946 में रिहाई के दो महीने बाद ही गोवा के मुक्ति संग्राम का नेतृत्व, नेपाल के लोकतांत्रिक आन्दोलन का (1950 तक) मार्गदर्शन। 1946 में बंगाल और बाद में दिल्ली में गांधी जी के शान्ति प्रयत्नों में सक्रिय योग। 1948 में हिन्द किसान पंचायत के अध्यक्ष। 1947-51 में समाजवादी दल की विदेश नीति समिति के सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में यूरोप यात्रा, 1951 में विश्व-यात्रा। 1954 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के महामंत्री। 1955-56, सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना, प्रथम अध्यक्ष। 1958 में अंग्रेज़ी हटाओ, दाम बाँधो, और जाति विनाश आन्दोलनों का सूत्रपात और संगठन-निर्माण। 1962 में फ़र्रुख़ाबाद उ.प्र. से उपचुनाव में लोकसभा के सदस्य निर्वाचित। 1964 में अमरीका यात्रा और रंगभेद के विरुद्ध सिविल नाफ़रमानी करने पर गिरफ़्तारी। 1966 में रूस और पूर्वी जर्मनी की यात्रा। 1937 से 1966 के बीच ब्रितानी, पुर्तगाली, और कांग्रेसी शासनों द्वारा कुल 18 बार गिरफ़्तार।

निधन : नई दिल्ली के विलिंग्डन अस्पताल में 12 अक्टूबर, 1967 में।

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