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Hindi Aalochana ka Aalochanatmak Itihas-Hard Cover

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9789392757600
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‘हिन्दी आलोचना का आलोचनात्मक इतिहास’ हिन्दी आलोचना का इतिहास है, लेकिन ‘आलोचनात्मक’। इसमें लेखक ने प्रचलित आलोचना की कुछ ऐसी विसंगतियों को भी रेखांकित किया है, जिनकी तरफ आमतौर पर न रचनाकारों का ध्यान जाता है, न आलोचकों का।

उदाहरण के लिए हिन्दी साहित्य के आलोचना-वृत्त से उर्दू साहित्य का बाहर रह जाना; जिसके चलते उर्दू अलग होते-होते सिर्फ एक धर्म से जुड़ी भाषा हो गई और उसका अत्यन्त समृद्ध साहित्य हिन्दुस्तानी मानस के बृहत काव्यबोध से अलग हो गया। कहने की जरूरत नहीं कि आज इसके सामाजिक और राजनीतिक दुष्परिणाम हमारे सामने एक बड़े खतरे की शक्ल में खड़े हैं। सुबुद्ध लेखक ने इस पूरी प्रक्रिया के ऐतिहासिक पक्ष का विवेचन करते हुए यहाँ उर्दू-साहित्य आलोचना को भी अपने इतिहास में जगह दी है।

आधुनिक गद्य साहित्य के साथ ही आलोचना का जन्म हुआ, इस धारणा को चुनौती देते हुए वे यहाँ संस्कृत साहित्य की व्यावहारिक आलोचना को भी आलोचना की सुदीर्घ परम्परा में शामिल करते हैं, और फिर सोपान-दर-सोपान आज तक आते हैं जहाँ मीडिया-समीक्षा भी आलोचना के एक स्वतंत्र आयाम के रूप में पर्याप्त विकसित हो चुकी है।

कुल इक्कीस सोपानों में विभाजित इस आलोचना-इतिहास में लेखक ने अत्यन्त तार्किक ढंग से विधाओं, प्रवृत्तियों, विचारधाराओं, शैलियों आदि के आधार पर बाँटते हुए हिन्दी आलोचना का एक सम्पूर्ण अध्ययन सम्भव किया है। अपने प्रारूप में यह पुस्तक एक सन्दर्भ ग्रंथ भी है और आलोचना को एक नए परिप्रेक्ष्य में देखने का वैचारिक आह्वान भी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2022
Edition Year 2022, Ed. 1st
Pages 472p
Price ₹1,695.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 25 X 16.5 X 3.5
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Dr. Amarnath

Author: Dr. Amarnath

डॉ. अमरनाथ

11 सितम्बर, 1953 को गाँव—रामपुर बुजुर्ग, जिला—महाराजगंज, उत्तर प्रदेश में जन्मे डॉ. अमरनाथ ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एम.ए., पी-एच.डी. की उपाधि अर्जित की।

हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के बीच सेतु निर्मित करने एवं भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के उद्देश्य से ‘अपनी भाषा’ नामक संस्था के गठन और संचालन में केन्द्रीय भूमिका। संस्था की पत्रिका ‘भाषा विमर्श’ का सन् 2000 से 2020 तक सम्पादन। हिन्दी परिवार को टूटने से बचाने और उसकी बोलियों को हिन्दी के साथ संगठित रखने के उद्देश्य से ‘हिन्दी बचाओ मंच’ का गठन और उसकी ओर से राष्ट्रव्यापी जन-जागरण अभियान का नेतृत्व। अपने गाँव में ‘श्री चंद्रिका शर्मा फूला देवी स्मृति सेवा ट्रस्ट’ का गठन और उसके मुख्य ट्रस्टी। ट्रस्ट की ओर से ‘ग्राम स्वराज पुस्तकालय’ का संचालन, उसकी पत्रिका ‘गाँव’ का सम्पादन एवं ग्राम केन्द्रित अन्य सामाजिक कार्यों में संलग्न।

‘हिन्दी आलोचना का आलोचनात्मक इतिहास’, ‘हिन्दी आलोचना की पारिभाषिक शब्दावली’, ‘आजाद भारत के असली सितारे’ (दो खण्ड), ‘नारी का मुक्ति संघर्ष’, ‘हिन्दी जाति’, ‘आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और परवर्ती आलोचना’, ‘आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का काव्य-चिन्तन’ आदि मौलिक कृतियों का प्रणयन एवं ‘समकालीन शोध के आयाम’, ‘हिन्दी भाषा का समाजशास्त्र’, ‘बाँसगाँव की विभूतियाँ’ आदि का सम्पादन किया।

हिन्दी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष।

ई-मेल : [email protected]

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