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Ghuspaithiye-Hard Cover

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ओमप्रकाश वाल्मीकि के इस संग्रह की तमाम कहानियाँ दलित सन्दर्भों से जुड़ी हुई हैं। यह दलित जीवन का यथार्थ है जिसे कहानीकार ने इन कहानियों में निहायत ही संजीदगी से, यथार्थ के प्रति वस्तुनिष्ठ रहते हुए, कहानी के रचना-विधान की संगति में दृष्टिकोण के समूचे खुलेपन के साथ चित्रित किया है। ये बेधक और मार्मिक कहानियाँ हैं।

व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश, कथा-विन्यास के अनुरूप तर्क और विचार, अनुभवजन्य ये कहानियाँ दलितों के सुख-दुःख, उनकी मुखरता और संघर्ष की कहानियाँ हैं।

वस्तुगत यथार्थ की संगति में जिस रचनात्मक कौशल के साथ इन कहानियों को ओमप्रकाश वाल्मीकि इस बिन्दु तक लाए हैं, वह उनके कहानीकार की ताक़त का साक्ष्य है। इन कहानियों में दलित और स्त्री की पीड़ाएँ मिलकर एक हो गई हैं। ओमप्रकाश वाल्मीकि में विवश, आन्तरिक घृणा का यह विस्फोट सृजनात्मक ऊर्जा का स्रोत है।

ये कहानियाँ सिर्फ़ दलित लेखन के दायरे की ही कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें उनकी रचना-सामर्थ्य और उनकी सोच के जो पहलू उभरे हैं, वे उन्हें हिन्दी की यथार्थवादी कहानी की परम्परा का कहानीकार सिद्ध करते हैं।

ओमप्रकाश वाल्मीकि कहानी के शिल्प, अन्तर्वस्तु, सौन्दर्य तथा पाठक पर उसके समग्र प्रभाव का ध्यान रखनेवाले रचनाकार हैं।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2003
Edition Year 2025, Ed. 6th
Pages 119p
Price ₹495.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1
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Omprakash Valmiki

Author: Omprakash Valmiki

ओमप्रकाश वाल्मीकि

 

जन्म : 30 जून, 1950; बरला, जिला—मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश।

शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य)।

प्रकाशित कृतियाँ : ‘सदियों का संताप’, ‘बस्स! बहुत हो चुका’, ‘अब और नहीं’, ‘शब्द झूठ नहीं बोलते’, ‘चयनित कविताएँ’ (कविता संग्रह); ‘जूठन’ (आत्मकथा) अँग्रेज़ी, जर्मन, स्वीडिश, पंजाबी, तमिल, मलयालम, कन्नड़, तेलगू में अनूदित एवं प्रकाशित; ‘सलाम’, ‘घुसपैठिए’ ‘अम्मा एंड अदर स्टोरीज’, ‘छतरी’ (कहानी-संग्रह); ‘दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र’, ‘मुख्यधारा और दलित साहित्य’, ‘दलित साहित्य : अनुभव, संघर्ष और यथार्थ’ (आलोचना); ‘सफाई देवता’ (सामाजिक अध्ययन)।

अनुवाद : ‘सायरन का शहर’ (अरुण काले) कविता-संग्रह का मराठी से हिन्दी में अनुवाद, ‘मैं हिन्दू क्यों नहीं’ (कांचा एलैया) का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद, ‘लोकनाथ यशवन्त’ की अनेक मराठी कविताओं का हिन्दी में अनुवाद।

अन्य : लगभग 60 नाटकों में अभिनय एवं निर्देशन, विभिन्न नाट्य-दलों द्वारा ‘दो चेहरे’ का मंचन, ‘जूठन’ के नाट्य-रूपान्तरण का कई नगरों में मंचन; अनेक राष्ट्रीय सेमिनारों में हिस्सेदारी, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में पुनश्चर्या पाठ्यक्रम में कई व्याख्यान, कई विश्वविद्यालयों, पाठ्यक्रमों में रचनाएँ शामिल, प्रथम हिन्दी दलित साहित्य सम्मेलन, 1993, नागपुर के अध्यक्ष, 28वें अस्मितादर्श साहित्य सम्मेलन, 2008, चन्द्रपुर, महाराष्ट्र के अध्यक्ष, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला सोसाइटी के सदस्य।

सम्मान : ‘डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार’, (1993); ‘परिवेश सम्मान’, (1995); ‘जयश्री सम्मान’, (1996); ‘कथाक्रम सम्मान’ (2001); ‘न्यू इंडिया बुक पुरस्कार’, (2004); ‘साहित्य भूषण सम्मान’, (2006); 8वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन, (2007), न्यूयॉर्क, ‘अमेरिका सम्मान’, ‘उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सम्मान’।

निधन : 17 नवम्बर, 2013

 

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