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Farishtey-Hard Cover

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9788119989041
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राजेन्द्र प्रसाद पांडेय उन विरले कहानीकारों में से हैं, जो अपने समय, समाज और व्यक्ति के चेहरे पर ओढ़ी हुई कृत्रिम परतों को प्याज के छिलके की तरह उकेरकर तह में छिपे उसके वास्तविक चेहरे को पाठकों के सामने पेश कर देते हैं। ‘बड़प्पन-छुटपन’ ऐसी ही कहानी है। उनकी कहानियाँ व्यक्ति मनोविज्ञान के साथ सामाजिक और समूह मनोविज्ञान का अनुभवजन्य आख्यान भी हैं। वे शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह की संवेदना के चितेरे कथाकार हैं। वे वहाँ के सामाजिक परिवेश, स्थिति-परिस्थति और संघर्ष के स्याह-सफेद पक्षों को आमने-सामने रखकर निर्णय के लिए पाठक को स्वतंत्र छोड़ देते हैं। वे समाज के तलहट में जीवनयापन करने वाले लोगों के जीवन के उस क्रूर और विकृत यथार्थ का दस्तावेजीकरण करते हैं, जो इससे पहले हिन्दी कथा संसार में लगभग अनुपस्थित था। उनकी कहानियाँ हर तरह के भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम छेड़ती हैं। उनकी कहानी ‘ठठरी’ इसका बेहतरीन उदाहरण है। कहानियाँ उनका अनुभवजन्य यथार्थ बनकर लोगों को संवेदित-उद्वेलित करती हैं, जिनमें देशज भाषा की छौंक सुगन्ध की तरह व्याप्त है। कहानियों का शिल्प बेहद चुस्त है। ‘फरिश्ते’ की कहानियाँ किसी वाद या आन्दोलन से न जुड़कर स्वतंत्रचेता लेखन की राह चलती हैं। इसलिए पाठक से तादात्म्य स्थापित कर उसे अलग तरह का पाठकीय आस्वाद प्रदान करती हैं।

—विनय दास

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2024
Edition Year 2024, Ed. 1st
Pages 160p
Price ₹595.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Rajendra Prasad Pandey

Author: Rajendra Prasad Pandey

राजेन्द्र प्रसाद पांडेय

राजेन्द्र प्रसाद पांडेय का जन्म 25 जून, 1947 को अर्का, कौशांबी, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने एम.ए.,पी-एच.डी. (हिन्दी) और साहित्याचार्य (संस्कृत) की उपाधि प्राप्त की। भाषा-विज्ञान में डिप्लोमा किया। कुछ समय असिस्टेंट प्रोफेसर रहे। फिर प्रशासनिक सेवा में आ गए। विभिन्न वरिष्ठ पदों पर रहते हुए प्रमुख सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए। हिन्दी में प्रकाशित उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘गाँव-बेगाँव’ (उपन्यास); ‘फरिश्ते’ (कहानी-संग्रह); ‘फूटती नदी’, ‘नदी में नदी’, ‘नदी चक्र’, ‘लड़कियाँ हैं तो’ (कविता-संग्रह); ‘नदिया नाव संजोग’ (संस्मरण); ‘साहित्य का आभामंडल’, ‘प्रीति न करियो कोय’, (ललित निबन्ध), ‘रचना और आज की चुनौतियाँ’, ‘हिन्दी कहानी : संवेदना और शिल्प’, ‘हिन्दी और देवनागरी’ (समालोचना)। प्रमुख संस्कृत कृतियाँ हैं—‘वेदमहत्त्वम्’, ‘कर्म विमर्श:’, ‘लौकिक रुद्राष्टाध्यायी’, ‘कालिदास का फलितार्थ’, ‘जीवनचिंतनम्’, ‘नवदृष्टि गीता’; ‘विश्व लघुकथावली’ (सम्पादन)। साहित्यिक पत्रिका ‘नान्दी’ का सन् 1986 से सम्पादन किया।  उपन्यास ‘गाँव-बेगाँव’ उ.प्र. हिन्दी संस्थान  द्वारा पुरस्कृत। उन्हें ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया।

26 अगस्त, 2019 को उनका निधन हुआ।

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