Chanda Ka Gond Rajya

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Chanda Ka Gond Rajya
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भारत के हृदय में स्थित विंध्याचल और सतपुड़ा की उपत्यकाएँ सघन वनों और पर्वत श्रेणियों के कारण प्राचीनकाल से ही दुर्गम रही हैं और भारत के इतिहास में इस क्षेत्र का उपयुक्त ऐतिहासिक विवरण मुश्किल से मिलता है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण इस पर उत्तर और दक्षिण की राजनीति का कम ही प्रभाव पड़ा। प्राचीनकाल में यहाँ मौर्यों, सातवाहनों, वाकाटकों, राष्ट्रकूटों, यादवों का आधिपत्य रहा। एक लम्बे अन्तराल के बाद खलजी और तुगलकों ने यादव सत्ता की चूलें हिला दीं। इसके बाद इस क्षेत्र में करीब दो सदियों तक कोई प्रबल सत्ता नहीं रही। दो सदियों के इस अंधकार युग के बाद चाँदा राज्य का उदय हुआ।

इस कृति में चाँदा राज्य के उत्थान और पतन का वर्णन करने हेतु नवीनतम सामग्री का उपयोग किया गया है। इस सामग्री में समकालीन और लगभग समकालीन फारसी अखबारात और मराठी पत्रों का स्थान महत्त्वपूर्ण है। इस कृति की विशेषता यह भी है कि चाँदा के गोंड राज्य की वंशावली तथा जल-आपूर्ति व्यवस्था पर इसमें विशेष चर्चा की गयी है, जो विभिन्न दृष्टिकोणों से इन विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास करती है। चूँकि मूल फारसी, मराठी स्रोतों में तथा सनदों में इसे चाँदा राज्य कहा गया है, अतः इस कृति में इसे चाँदा राज्य ही कहा गया है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2008
Edition Year 2022, Ed. 2nd
Pages 124p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
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Editorial Review

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Suresh Mishra

Author: Suresh Mishra

सुरेश मिश्र

जन्म : 9 नवम्बर, 1937; महाराजपुर, मंडला (मध्य प्रदेश)।

शिक्षा : एम.ए. इतिहास 1960 (विक्रम), पीएच.डी. 1973 (सागर)।

1960-98 तक मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में इतिहास का अध्यापन।

प्रमुख कृतियाँ : ‘अकबर’, ‘गढ़ा के गोंड राज्य का उत्थान और पतन’, ‘पश्चिमोत्तर सीमान्त नीति’ (1839-1947), ‘रानी दुर्गावती’, ‘मध्य प्रदेश के गोंड राज्य’, ‘भारत का इतिहास’ (1740-1857), ‘1857—मंडला के दस्तावेज़’, ‘1857—रामगढ़ की रानी अवन्तीबाई’, ‘1857—मध्य प्रदेश के रणबाँकुरे’, ‘1842 के विद्रोही हीरापुर के हिरदेशाह’, ‘इतिहास के पन्नों से’, ‘क़ाफ़ि‍ले यादों के’, ‘ट्राइबल्स असेंडेंसी इन सेंट्रल इंडिया—द गोंड किंगडम ऑफ़ गढ़’।

सम्‍पादन : ‘मालवा और निमाड़ का इतिहास’ (1994); ‘मालवा और बुन्देलखंड’ (1996); ‘साहित्य में इतिहास’ (1998); ‘मध्ययुगीन मध्य प्रदेश’ (1998); ‘संधान’-1 (झाँसी) (2003); ‘संधान’-2 (झाँसी) (2004); ‘संधान’-3 (झाँसी) (2005); ‘संधान’-4 (झाँसी) (2006); ‘संधान’-5 (झाँसी) (2007)।

अनुवाद : ‘भारतीय संस्कृति पर इस्लाम का प्रभाव’, ‘ख़लजी वंश का इतिहास’, ‘लोक प्रशासन’, ‘भारतीय कृष्णमृग’, ‘मिथ्स ऑफ़ मिडिल इंडिया’।

हिन्दी संक्षिप्तीकरण : ‘आधी दुनिया भूखी क्यों’ (दूसरा संस्करण); ‘बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर सरकारें मेहरबान’, ‘दुनिया की भुखमरी : 12 ग़लतफ़हमियाँ’।

निधन : 22 अप्रैल, 2021

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