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Chand Ke Paar Ek Chabhi-Paper Back

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9788126728398
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कोई भी विधा जितना कथ्य होती है, उससे कुछ ज़्यादा फ़ॉर्म होती है। फ़ॉर्म से ही पता चलता है कि रचनाकार ने सामाजिक के रूप में अपने समय में ख़ुद को कहाँ स्थित किया है। अवधेश प्रीत का कहानीकार अपने कथ्य को एक सन्तुलित दूरी से देखता और उसका अंकन करता है जिसके बल ही शायद उनकी कहानी भी पाठक को अपने आनन्द में डुबो लेने के बजाय एक ख़ास दूरी पर खड़ा रखकर अपने कथ्य को वस्तुगत ढंग से देखने को बाध्य करती है। इसी संग्रह में शामिल शीर्षक कहानी 'चाँद के पार एक चाभी' जाति की जड़ और विकट संरचना, उसके सम्मुख प्रेम की असहायता और असम्भवता, और साथ ही आधुनिकता के साथ जगती उम्मीदों के नए अंकुरों की कहानी है। यह कहानी आँसुओं की बाढ़ ला सकती थी, लेकिन अगर नहीं लाती और पढ़ने के बाद डूबने के बजाय चिन्ता में डाल देती तो यह उसके शिल्प के चलते है।

शिल्प का यह जादू वे भाषा के प्रयोग में ख़ास तौर पर साधते हैं। उनका क़िस्सागो दृश्य को बखानने की प्रक्रिया में चीज़ों को देखने का एक नज़रिया पाठक को देता चलता है जो गुदगुदाता भी है और कहानी के साथ-साथ पात्रों के चरित्र की रेखाओं को भी उभारना चलता है।

अवधेश प्रीत जाने-माने कथाकार हैं। लगातार पढ़े जाते रहे हैं। मनुष्यता के हामी किसी भी लेखक को समाज में जिन चीज़ों से विचलित होना चाहिए, उन सबको ईमानदारी से देखने के साक्ष्य इन कहानियों में भरे पड़े हैं।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2016
Edition Year 2016, Ed. 1st
Pages 172p
Price ₹250.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Avadhesh Preet

Author: Avadhesh Preet

अवधेश प्रीत

कथाकार, पत्रकार अवधेश प्रीत का जन्म 13 जनवरी, 1958 को गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश के ताराँव गाँव में हुआ। पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत गाँव से हुई। उच्च शिक्षा कुमाऊँ विश्वविद्यालय, उत्तराखंड से पाई। साहित्य लेखन व रंगकर्म की शुरुआत उधमसिंह नगर से की। 1985 से बिहार में पत्रकारिता करने लगे।

आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘अशोक राजपथ’ (उपन्यास); ‘हस्तक्षेप’, ‘नृशंस’, ‘हमज़मीन’, ‘कोहरे में कंदील’, ‘चांद के पार एक चाभी’ (कहानी-संग्रह)।

देश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में आपकी कहानियाँ, समीक्षाएँ, लेख आदि प्रकाशित हो चुके हैं। कई कहानियों के अनुवाद उर्दू, अंग्रेज़ी, मराठी और गुजराती में हो चुके हैं।

कुछ कहानियों के मंचन भी हुए हैं जिनमें ‘नृशंस’ (एन.एस.डी., दिल्ली), ‘बाबू जी की छतर’ (एक्ट वन, दिल्ली), ‘ग्रासरूट’ (थिएटर यूनिट, पटना), ‘हमज़मीन’ (अक्षरा, पटना; इंटीमेट थिएटर, इलाहाबाद), ‘तालीम’ (रंगश्री, पटना) और ‘चांद के पार एक चाभी’ (थिएट्रॉन, लखनऊ) उल्लेखनीय हैं। ‘अली मंज़िल’ और ‘अलभ्य’ कहानियों पर दूरदर्शन द्वारा टेलीफ़िल्म का निर्माण व प्रसारण।

आप ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी कथा सम्मान’, ‘सुरेन्द्र चौधरी कथा सम्मान’, ‘विजय वर्मा कथा सम्मान’, ‘फणीश्वरनाथ रेणु कथा सम्मान’ से सम्मानित हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान, पटना में वर्षों तक सहायक सम्पादक रहे। सेवानिवृत्ति के बाद फ़िलहाल स्वतंत्र लेखन।

निधन : 12 नवम्बर, 2025

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