Hamzamin

Fiction : Stories
Author: Avadhesh Preet
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Hamzamin
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अवधेश प्रीत उन थोड़े से कथाकारों में हैं जो यथार्थ की भीतरी तह तक पहुँचकर उसकी आन्तरिक गतिशीलता को उजागर करते हैं। उनकी कहानियों में जीवन के गहरे अनुभव के साथ-साथ समाज में होनेवाले परिवर्तनों के संकेत भी मिलते हैं। विसंगतियों और विडम्बनाओं का चित्र उकेरते वक़्त उनकी नज़र हमेशा उन वंचितजनों पर टिकी होती है, जो अपनी स्थिति से उबरने तथा समाज के बदलने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं। सपाटबयानी से बचते हुए अवधेश अपने एक-एक अनुभव को पहले वैचारिक धरातल पर सूत्रबद्ध करते हैं, फिर उनके कलात्मक संग्रन्थन से ऐसी फंतासी रचते हैं जिसमें किरदारों के आत्मसंघर्ष तथा सामाजिक संघर्ष के बीच की विभाजक रेखा मिट जाती है। उनका यह शिल्प ही उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता है।

‘हमज़मीन’ संग्रह की कहानियों में अवधेश प्रीत ने साम्प्रदायिक और सामंती क्रूरताओं के शिकार वंचितों तथा स्त्रियों की पीड़ाओं के चित्रण के साथ-साथ उनके संघर्ष और जिजीविषा को रेखांकित करने का जो सार्थक प्रयास किया है वह उल्लेखनीय है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2006
Edition Year 2006, Ed. 1st
Pages 135p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Editorial Review

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Avadhesh Preet

Author: Avadhesh Preet

अवधेश प्रीत

कथाकार, पत्रकार अवधेश प्रीत का जन्म 13 जनवरी, 1958 को गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश के ताराँव गाँव में हुआ। पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत गाँव से हुई। उच्च शिक्षा कुमाऊँ विश्वविद्यालय, उत्तराखंड से पाई। साहित्य लेखन व रंगकर्म की शुरुआत उधमसिंह नगर से की। 1985 से बिहार में पत्रकारिता करने लगे।

आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘अशोक राजपथ’ (उपन्यास); ‘हस्तक्षेप’, ‘नृशंस’, ‘हमज़मीन’, ‘कोहरे में कंदील’, ‘चांद के पार एक चाभी’ (कहानी-संग्रह)।

देश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में आपकी कहानियाँ, समीक्षाएँ, लेख आदि प्रकाशित हो चुके हैं। कई कहानियों के अनुवाद उर्दू, अंग्रेज़ी, मराठी और गुजराती में हो चुके हैं।

कुछ कहानियों के मंचन भी हुए हैं जिनमें ‘नृशंस’ (एन.एस.डी., दिल्ली), ‘बाबू जी की छतर’ (एक्ट वन, दिल्ली), ‘ग्रासरूट’ (थिएटर यूनिट, पटना), ‘हमज़मीन’ (अक्षरा, पटना; इंटीमेट थिएटर, इलाहाबाद), ‘तालीम’ (रंगश्री, पटना) और ‘चांद के पार एक चाभी’ (थिएट्रॉन, लखनऊ) उल्लेखनीय हैं। ‘अली मंज़िल’ और ‘अलभ्य’ कहानियों पर दूरदर्शन द्वारा टेलीफ़िल्म का निर्माण व प्रसारण।

आप ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी कथा सम्मान’, ‘सुरेन्द्र चौधरी कथा सम्मान’, ‘विजय वर्मा कथा सम्मान’, ‘फणीश्वरनाथ रेणु कथा सम्मान’ से सम्मानित हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान, पटना में वर्षों तक सहायक सम्पादक रहे। सेवानिवृत्ति के बाद फ़िलहाल स्वतंत्र लेखन।

ई-मेल : avadheshpreet950@gmail.com

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