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Biskohar Ki Vasantsenayein

Author: Kumar Anupam
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Biskohar Ki Vasantsenayein

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जंगल-जंगल घूमकर वैदिक ऋचाएँ रचनेवाली ब्रह्मवादिनियों, बुद्ध से प्रत्यक्ष संवाद करनेवाली थेरियों और ज्ञानिनामअग्रगण्य उद्धव से हँसमुख विवाद में उन्हें एकदम अवाक् छोड़ जानेवाली (भ्रमरगीत की) गोपियों के समकक्ष ‘बिस्कोहर की वसंतसेनाएँ’ की सामूहिक इयत्ता रेखांकित करनेवाली यह कविता-शृंखला स्त्री-विमर्श के गर्भ से जन्मे एक नवल पुरुष का सार्थक हस्तक्षेप है। टेलिस्कोपन तकनीक से इन मज़दूर/मजबूर यौनकर्मियों का जीवन पहले तो ज़ूम आउट करके दूर से दिखाया जाता है, फिर धीरे-धीरे फोकल शिफ्ट के सहारे एक-एक के जीवन की विडम्बनाएँ अन्तरंग विवरणों के साथ ऐसे उजागर की जाती हैं जैसे दोस्तोवस्की की ‘क्राइम एंड पनिशमेंट’ में सोनिया के जीवन की।

अनामिका

कुमार अनुपम की यह कविता पुस्तक उन स्त्रियों की गाथा है जिन्हें ‘सब्बेसं हेतु’ माना गया; यह ‘स्त्री होने के दुख’ का महाकाव्य है; ‘नृशंस अतृप्ति’ की घोर भर्त्सना है और ‘चींटी के ख़्वाब की मानिन्द’ सबसे पवित्र स्वप्न, मुक्तिस्वप्न, का साकार रूप है। ‘बिस-को-हर’ की प्रार्थना को अभिहित करता ग्राम बिस्कोहर अद्भुत कथाओं और दन्तकथाओं का क्षेत्र है। अनुपम ने तरल भावों को अपनी विचार शक्ति और शोध से सुदृढ़ किया है। अनुपम ने समतुल्य लय-गति से समय की गति को पकड़ा है। बेहद सादे, सरल पदों और वाक्यों में; लेकिन ‘बहुत सरल लगने वाले वाक्य अक्सर सरल नहीं होते’। यह एक संश्लिष्ट और अनेक स्तरों वाली संरचना है, कथा और गीत को सम्मिश्रित करती, और लोककथा से लेकर विष्णु पुराण तथा थेरी गाथा और अम्बपाली तक के विपुल प्रसार को आयत्त करती—कल्पना की उत्ताल पेंगों तक पाठक को ले जाती। अपने अन्तिम प्रभाव में अत्यन्त कारुणिक यह कृति समकालीन भारतीय काव्य का अप्रतिम प्ररोह है।

अरुण कमल

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 128p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 11.5 X 1
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Author: Kumar Anupam

कुमार अनुपम

कुमार अनुपम कवि, चित्रकार, कला समीक्षक और सम्पादक हैं। ‘बारिश मेरा घर है’ और ‘कविता समय-1’ शीर्षक से उनके कविता-संग्रह प्रकाशित हैं। चार सम्पादित और दो अनूदित पुस्तकें भी प्रकाशित। उनकी पुस्तकें—‘युद्ध के विरुद्ध’ (विश्व कविता से एक चयन, चार खंडों में) तथा प्रख्यात चित्रकार सुधीर पटवर्धन पर मोनोग्राफ़ ‘सुधीर पटवर्धन : जन का कलाकार’ काफी सराही गईं। उनकी कविताओं का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुए हैं। उन्हें ‘भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार’, ‘साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार’, ‘कविता समय सम्मान’, ‘विष्णु प्रभाकर साहित्य सम्मान’, ‘मीरा स्मृति सम्मान’, ‘हिंदी सेवा विशिष्ट सम्मान’, भारतीय वांग्मय पीठ कोलकाता से ‘युगपुरुष स्वामी विवेकानंद पत्रकार रत्न सारस्वत सम्मान’ (मानद उपाधि) आदि सम्मानों से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected] 

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