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Bheer Ke Bhavsagar Mein-Hard Cover

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विनय दुबे कविता से खेलते हैं, जैसे कोई बच्चा खेलता है, लेकिन खिलौनों से नहीं, किसी खेल के औज़ार से जैसे—हॉकी या बल्ला, जिससे चाहें तो हथियार का काम भी लिया जा सकता है। खेल-खेल में बनती दिखती ये कविताएँ इसीलिए पढ़ने-सुनने के थोड़ी देर बाद धारदार शस्त्र की तरह चमकती प्रतीत होती हैं।

विनय दुबे, जैसा उन्होंने स्वयं कहा, चीज़ों को ‘गम्भीरता’ से नहीं, ‘कॉमिकली’ लेते थे। बड़ेपन और ताक़त के आरोपित मुलम्मे से ढकी चीज़ों को जैसे वे अपने जीवन में शरारत से हिला-डुलाकर देखते रहे होंगे, वैसे ही उनकी कविताएँ भी देखती हैं। मसलन ‘मैं शिकायत करूँगा’ शीर्षक कविता में ईश्वर से उनका सम्बोधन—‘‘प्रधानमंत्री जी से आपकी शिकायत करने जा रहा हूँ कि जो/ईश्वर है वह मेरी नहीं सुनता है।’’ जिस चीज़ पर उनकी कविता अन्ततः भरोसा करती है, वह है स्थानीयता और मामूलीपन, उसी के पक्ष में उसकी तमाम मुद्राएँ हैं। वे उस विचार से भी आतंकित नहीं जो पूँजी की तरह बर्ताव करने लगता है, न अन्तरराष्ट्रीयता से, न धन बल से, न सत्ता बल से। ‘‘मेरा प्रेम होशंगाबाद के अमरूद हैं/...दिल्ली की राजनीति नहीं है। कोई सद्भावना यात्रा भी नहीं है प्रधानमंत्री जी की।’’ तमाम ताक़तों के ख़िलाफ़ उनकी कविताएँ आधा-सा हँसता हुआ एक विदूषकीय मुखौटा गढ़ती हैं, कोई विमर्श नहीं, क्योंकि विमर्श फिर एक-एक सत्ता की तरह पेश आने लगता है। उनकी कविता का अटूट विश्वास प्रेम है, जहाँ वह बार-बार लौटती है, कुछ ऐसे निष्कर्षों के साथ—‘हमारे समय का सबसे बड़ा झूठ/शासन है हमारे समय का सबसे बड़ा अन्याय/प्रशासन है हमारे समय का सबसे बड़ा फ़रेब/दिल्ली है’ (‘दुखी है कबीरदास’ कविता से)

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Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2009
Edition Year 2009, Ed. 1st
Pages 104p
Price ₹150.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1
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Author: Vinay Dube

विनय दुबे

मध्य प्रदेश के एक गाँव—जमानी, ज़िला—होशंगाबाद में सन् 1924 में जन्म हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा इटारसी में हुई और वहीं लगभग छह वर्षों तक शिक्षक के रूप में कार्य किया। फिर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से ऊँची शिक्षा ली और पीएच.डी. की उपाधि भी प्राप्त की। सन् 1970 से भोपाल के एक महाविद्यालय में प्राध्यापन कार्य करते हुए 2003 में सेवानिवृत्त हुए।

मुख्यतः कवि। काव्य-नाटक भी लिखे। कई सम्मान और फ़ेलोशिप मिले। मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की रचनात्मक लेखन के लिए ‘मुक्तिबोध फ़ेलोशिप’। ‘नागार्जुन सम्मान’। कविता के लिए ‘माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार’। साहित्य अकादेमी दिल्ली की सीनियर फ़ेलोशिप। मध्य प्रदेश सरकार का ‘शिखर सम्मान’।

प्रमुख कृतियाँ : ‘महामहिम चुप हैं’, ‘सपनों में आता है राक्षस’, ‘खलल’, ‘वैसे मैं कहूँ जैसे कहे नीम’, ֹ‘तत्रकुशलम’। (ये सभी कविता-संग्रह)। ‘फ़िलहाल यह आस-पास’ चुनी हुई कविताओं का संकलन। ‘दो एकम दो’ (नारायणपुर तथा अब ‘विलम्बु केहि काज’, काव्य नाटक), ‘तनाव’ पत्रिका की अनुवाद शृंखला में क्यूबा के कवि इबार्तो पदिल्लया की कविताओं के अंग्रेज़ी से अनुवाद और ‘भौं-भौं म्याऊँ’, ‘छुटकी गिलहरी’, ‘खानू गाँव’ की कहानियाँ हैं।

निधन : 4 सितम्बर, 2007

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