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Bhasha Ka Samajshastra-Hard Cover

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वेदों में ‘मनुष्य’ और ‘मानुष’ एक साथ कैसे चलते हैं? कौन किसका अपभ्रंश है? अगर मनुष्य में षष्ठी विभक्ति है तो मानुष में कौन-सी विभक्ति है जिसके बलबूते पहले की व्युत्पत्ति मनु की सन्तति की जाती है? वैदिक ‘मान’ का अर्थ है घर, जो घर में रहता है, वह ‘मानुष’ है और जो वन में रहता है, वह ‘वनमानुष’ है; इसीलिए ‘वनमनुष्य’ पद नहीं चलता है। हिन्दी भाषी क्षेत्र की लोकबोलियों में मानुस शब्द चलता है, मनुष्य नहीं। इसलिए यह दावा करना कि लोकबोलियों के सभी शब्द संस्कृत के अपभ्रंश हैं, ग़लत होगा। भोजपुरी में जानवरों की माँद को आज भी मान/मनान कहा जाता है। लोकबोलियों में मनुष्य को ‘मनई’ भी कहा जाता है यानी मान (घर) में रहनेवाला जैसे कि मान (घर) में रहनेवाले को खड़ी बोली में ‘मानव’ कहा जाता है। ‘मान’ का क्रियामूल ‘मा’ है जिसका अर्थ होता है—निर्माण करना। यह क्रियामूल मठ, मण्डप, मन्दिर, माँद, मान, मनान, माड़ो—सभी में मौजूद है। ‘मानुष’ तत्सम है, ‘मनुष्य’ तद्भव है।

संस्कृत में बहुत सारे शब्द मिलेंगे जो लोकबोलियों के आधार पर गढ़े गए हैं परन्तु ग़लती से उसे तत्सम मान लिया जाता है। कारण कि हमारी भाषावैज्ञानिक स्थापना रही है कि संस्कृत पुरानी भाषा है, इसलिए लोकबोलियों के शब्द तद्भव हैं जबकि संस्कृत का पहला लम्बा अभिलेख 150 ई. में पश्चिमी भारत के जूनागढ़ से मिलता है। प्राकृत के अभिलेख भारत में सबसे पुराने हैं। वैदिक भाषा पुरानी है, वैदिक संस्कृति भी पुरानी है तब इस तथ्य की भी पड़ताल की जानी चाहिए कि वैदिक युग के तथाकथित सोने के सिक्के ‘निष्क’ कहाँ गए जबकि धातु के सिक्के सबसे पहले गौतम बुद्ध के युग में मिलते हैं।

भाषा का समाजशास्त्र इस बात का जवाब देगा कि मागधी प्राकृत के साथ संस्कृत के आचार्यों ने दोयम दर्जे का व्यवहार क्यों किया है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2004
Edition Year 2024, Ed. 6th
Pages 103p
Price ₹595.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Rajendra Prasad Singh

Author: Rajendra Prasad Singh

राजेन्द्रप्रसाद सिंह

अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त भाषावैज्ञानिक, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएच.डी.।

प्रकाशित प्रमुख कृतियाँ : ‘भाषा का समाजशास्त्र’, ‘भारत में नाग परिवार की भाषाएँ’, ‘भोजपुरी के भाषाशास्त्र’, ‘भोजपुरी व्याकरण’, ‘शब्दकोश आ अनुवाद के समस्या’, ‘हिन्दी साहित्य का सबाल्टर्न इतिहास’, ‘हिन्दी साहित्य प्रसंगवश’ आदि।

सम्पादित पुस्तकें : ‘कहानी के सौ साल : चुनी हुई कहानियाँ’, ‘काव्यतारा’, ‘काव्य रसनिधि’, ‘दलित साहित्य का इतिहास-भूगोल’, ‘भोजपुरी-हिन्दी-इंग्लिश लोक शब्दकोश’, ‘पंचानवे भाषाओं का समेकित पर्याय शब्दकोश’, ‘साहित्य में लोकतंत्र की आवाज़’।

अंग्रेज़ी में अनूदित पुस्तकें : ‘दि री-राइटिंग प्रॉब्लम्स ऑव भोजपुरी ग्रामर’, ‘डिक्शनरी एंड ट्रांसलेशन’, ‘लैंग्वेजेज ऑव नाग फैमिली इन इंडिया’।

इग्नू की पाठ्य-पुस्तकें : ‘भोजपुरी भाषा और लिपि’, ‘भोजपुरी व्याकरण’, ‘भोजपुरी अनुवाद’।

मॉरीशस सरकार के विशेष अतिथि एवं वहाँ सात दिवसीय व्याख्यान; बी.बी.सी. लन्दन तथा एम.बी.सी., पोर्ट लुई सहित देश के कई आकाशवाणी केन्द्रों से साक्षात्कार एवं वार्ताएँ प्रसारित।

कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों एवं कार्यशालाओं में सहभागिता तथा व्याख्यान।

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