Bhramar Geet : Saundaryashastriya Anushilan

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Bhramar Geet : Saundaryashastriya Anushilan
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हिन्दी में जिस समय आधुनिक काल से पहले की साहित्यिक घटनाओं पर शोध कार्य अत्यन्त अल्प हो चुका है, उस समय श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह की पुस्तक ‘भ्रमरगीत : सौन्दर्यशास्त्रीय अनुशीलन’ का प्रकाशन आश्वस्तिकारक है। शोध और आलोचना के क्षेत्र में यह पुस्तक विज्ञ जन और आम पाठक दोनों के लिए उपादेय होगी, ऐसा विश्वास है। हिन्दी में भ्रमरगीत की सुदीर्घ परम्परा का अवगाहन कर लेखक ने उसे समझने और उसमें निमग्न होने के विस्तृत आधार प्रस्तुत किए हैं। मध्य युग से लेकर आधुनिक समय तक चली आती इस वैभवशाली काव्य-परम्परा का सौन्दर्यशास्त्रीय मान-मूल्यों के आलोक में अनुशीलन जिस गम्भीर अध्यवसाय की माँग करता है, उसका प्रमाण पुस्तक के हरेक अध्याय में मिलता है। आशा है यह पुस्तक हिन्दी साहित्य के रिक्थ को और समृद्ध करेगी।

—प्रो. प्रणय कृष्ण

विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग,

इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 264p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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Rajendra Prasad Singh

Author: Rajendra Prasad Singh

राजेन्द्रप्रसाद सिंह

अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त भाषावैज्ञानिक, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएच.डी.।

प्रकाशित प्रमुख कृतियाँ : ‘भाषा का समाजशास्त्र’, ‘भारत में नाग परिवार की भाषाएँ’, ‘भोजपुरी के भाषाशास्त्र’, ‘भोजपुरी व्याकरण’, ‘शब्दकोश आ अनुवाद के समस्या’, ‘हिन्दी साहित्य का सबाल्टर्न इतिहास’, ‘हिन्दी साहित्य प्रसंगवश’ आदि।

सम्पादित पुस्तकें : ‘कहानी के सौ साल : चुनी हुई कहानियाँ’, ‘काव्यतारा’, ‘काव्य रसनिधि’, ‘दलित साहित्य का इतिहास-भूगोल’, ‘भोजपुरी-हिन्दी-इंग्लिश लोक शब्दकोश’, ‘पंचानवे भाषाओं का समेकित पर्याय शब्दकोश’, ‘साहित्य में लोकतंत्र की आवाज़’।

अंग्रेज़ी में अनूदित पुस्तकें : ‘दि री-राइटिंग प्रॉब्लम्स ऑव भोजपुरी ग्रामर’, ‘डिक्शनरी एंड ट्रांसलेशन’, ‘लैंग्वेजेज ऑव नाग फैमिली इन इंडिया’।

इग्नू की पाठ्य-पुस्तकें : ‘भोजपुरी भाषा और लिपि’, ‘भोजपुरी व्याकरण’, ‘भोजपुरी अनुवाद’।

मॉरीशस सरकार के विशेष अतिथि एवं वहाँ सात दिवसीय व्याख्यान; बी.बी.सी. लन्दन तथा एम.बी.सी., पोर्ट लुई सहित देश के कई आकाशवाणी केन्द्रों से साक्षात्कार एवं वार्ताएँ प्रसारित।

कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों एवं कार्यशालाओं में सहभागिता तथा व्याख्यान।

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