Bharat Mein Manavaadhikar

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Bharat Mein Manavaadhikar
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मानवाधिकारों की अवधारणा वर्तमान सामाजिक विमर्शों में एक महत्त्वपूर्ण तथा सार्वदेशिक मूल्य का स्थान रखती है। 1215 ई. में पारित मैग्नाकार्टा के आरम्भिक स्वरूप से चलकर आज यह अवधारणा मौजूदा विश्व–सभ्यता का ठोस घटक बन चुकी है। इस पुस्तक का उद्देश्य भारतीय संस्कृति में इस घटक की पहचान करना और यह देखना है कि हमारे इतिहास के विभिन्न चरणों में मानवाधिकारों की स्थिति क्या थी।

मूलत: अध्यात्म प्रमुख भारतीय संस्कृति के अनुसार मनुष्य प्रकृति का ही एक अंग है, जिसके साहचर्य में ही वह अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों का निर्वहन करता है। ऋग्वेद में भी यह वर्णन आया है कि हम अपना सम्पूर्ण विकास सबके कल्याण को ध्यान में रखते हुए ही कर सकते हैं, और यही मानवाधिकार की अवधारणा की केन्द्रीय निष्ठा है। प्राचीन समाज में हालाँकि मानव–अधिकारों की स्थिति इतनी स्पष्टता के साथ परिभाषित नहीं है, लेकिन यह सर्वमान्य है कि भारतीय समाज–व्यवस्था ने अपने समाज में व्यक्ति तथा समष्टि के परस्पर सन्तुलन के लिए कुछ नियमों या सिद्धान्तों का निर्धारण अवश्य किया था।

‘भारत में मानवाधिकार’ पुस्तक में प्राचीन हिन्दू धर्म–दर्शन में मानवाधिकारों की अभिकल्पना, जैन तथा बौद्धधर्म व कौटिल्य के समय में मानवाधिकारों की अवस्थिति, मध्यकालीन युग और पुनर्जागरण के दौरान और उसके बाद के समय में मानवाधिकारों की दशा–दिशा का आकलन किया गया है। इसके साथ ही स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद मानवाधिकारों को लेकर हमारी चेतना तथा उनके संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों की तथ्यपरक जानकारी भी दी गई है। परिशिष्ट खंड में मानव अधिकार अधिनियम 1993, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (प्रक्रिया) विनियम–1994 तथा सूचना के अधिकार पर भी सामग्री दी गई है जो इस पुस्तक को और मूल्यवान बनाती है।

 

 

 

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2015
Edition Year 2022, Ed. 3rd
Pages 200p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Editorial Review

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Author: Satya Narayan Sabat

सत्य नारायण साबत

सत्य नारायण साबत हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में समान रूप से लेखक हैं। मूलतः पदार्थ विज्ञान से स्नातकोत्तर एवं प्रबन्धन (मानव संसाधन) का अध्ययन करने के बाद भारतीय संस्कृति एवं मानव अधिकार जैसे विषयों के शोध-कार्य में आपकी दिलचस्पी हुई। भारतीय संस्कृति में मानव अधिकार विषय पर लिखा आपका लेख वर्ष 2004 में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा प्रकाशित ‘नई दिशाएँ’ पुस्तक में प्रकाशित हुआ। इसके अलावा इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ ह्यूमन राइट्स, लन्दन में भी वर्ष 2007 में मानवाधिकार विषयक आपका शोध प्रकाशित हुआ। राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पत्रिकाओं में आपके लेख प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2006 में आपकी कृति ‘भारतीय संस्कृति में मानव अधिकार की अवधारणा’ को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया जा चुका है। आप भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के शान्ति मिशन (कोसोगो) में सराहनीय कार्य के लिए आपको विश्व शान्ति पदक से नवाजा जा चुका है। आप भारत के राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2006 और वर्ष 2014 में अपनी विशिष्ट सेवा हेतु पुलिस पदक से विभूषित किए जा चुके हैं।

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